भारत में आधुनिक उद्योग-

उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में कुछ आधुनिक उद्योग अस्तित्व में आए यह दो प्रकार के थे बागानी उद्योग और मशीन उद्योग इन उद्योगों पर प्रमुखता ब्रिटिश कंपनियों का स्वामित्व और नियंत्रण था भारतीय भी कुछ उद्योगों के मालिक थे परंतु सरकार के सहयोग से ना मिलने के कारण भारतीयों के इन उद्योगों को तेजी से विकास ना हो सका औद्योगिक विकास के प्रारंभ के दौर में प्रत्येक देश को विदेशी प्रतियोगिता से अपने को बचाने के लिए संरक्षण की नीति अपनानी पड़ती है परंतु भारत में ब्रिटिश सरकार ने लंबे समय तक इस प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की क्योंकि उससे इंग्लैंड के हितों को हानि पहुंचती थी स्वदेशी आंदोलन का प्रारंभ 1905 में हुआ था स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अंग था इसने भारतीयों को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया पिछली सदी के तीसरे सब दशक में कुछ उद्योगों को संरक्षण प्राप्त हुआ दूसरे महायुद्ध के दौरान सैनिक प्रयोग व लोगों के उपयोग दोनों के लिए वस्तुओं की मांग बढ़ी जितनी वस्तुएं आयात होती थी उससे मांग कहीं अधिक थी ऐसी स्थिति में भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिलना स्वाभाविक था तथा सरकार ने भी उन्हें संरक्षण का आश्वासन दिया लेकिन बड़े स्तर पर औद्योगीकरण का आरंभ भारत के स्वतंत्र होने पर ही हुआ।
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