कैग एक संवैधानिक पद है जो लोक वित्त का संरक्षक एवं लेखा परीक्षक व लेखा विभाग का मुखिया होता है। कैग की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। इसका कार्यकाल 6 वर्षों या 65 वर्षों (जो भी पहले हो) की आयु तक होता है। वह भारतीय नागरिक जो लोक वित्त विशेषज्ञ हो अथवा लोकसेवक (10 वर्ष न्यूनतम) हो, कैग बन सकता है। यह योग्यता संसद द्वारा निर्धारित है। कैग को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही पद से हटाया जा सकता है। कैग का नियंत्रण केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर होता है। कैग का वेतन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होता है सेवानिवृत्ति के पश्चात वह भारत का या राज्य सरकार के अधीन किसी पद को धारण करने का पात्र नहीं होगा। [अनुच्छेद 148 (4)]
कैग सरकारी कंपनियों, प्राधिकरण व निकाय (केंद्र व राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त) व अन्य निगमो या निकायों (विधि अथवा संबद्ध नियमों के तहत) का भी लेखा परीक्षण कर सकता है। कैग विनियोग, वित व सरकारी उपक्रमों का लेखा परीक्षण कर राष्ट्रपति के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के समक्ष रखवाता है। कैग लोक सेखा समिति की बैठकों में भाग लेता है और उसे इस समिति का मित्र एवं मार्गदर्शक भी कहा जाता है।
वर्तमान में (कैग) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक- राजीव महर्षि है