बहादुर शाह ( 1707 - 1712 )

  • उपनाम - मुअज्जम , शाह आलम ,  शाहे बेखबर
  • गंद्दी उत्तराधिकार किशनगढ़ में अपने भाई आजम को आजमगढ़ के समीप जाजू के युद्ध में परास्त किया ।
  • 1707 में लाहौर के पास शाहदौला नामक स्थान पर मुअज्जम न स्वयं को बहादुर शाह के नाम से सम्राट घोषित किया ।
  • गुरु गोविंद सिंह ने उसके साथ दक्कन युद्ध में भाग लिया ।
  • राजपूताना से संबंधों में सर्वप्रथम उसने मारवाड़ के अजीत सिंह को परास्त किया तथा उन्हें 3500 का  मनबस तथा महाराजा की उपाधि दी बाद में दुर्गादास राठौड़ और जय सिंह के साथ अजीत सिंह ने भी अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी और बहादुर शाह ने उन्हें स्वीकार लिया  ।
  • इतिहासकार खंफी खां ने कहा कि बहादुरशाह राजकीय कार्यों में इतना अधिक लापरवाह था कि लोग उसे शाहे बेखबर कहने लगे ।
  • इसका शव एक महीने तक नहीं दफनाया गया बाद में मकबरे में दफन‌ किया गया ।
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