भारत भूटान सम्बन्ध

  • भारत और भूटान के बीच विलक्षण सौहार्दपूर्ण और विशेष संबंध है, जो पारस्परिक विश्वास और समझ बूझ पर आधारित है।
  • यात्राओं का नियमित आदान-प्रदान, घनिष्ठ परामर्श और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग भूटान के साथ हमारे संबंधों की आधारशिला है।
  • भारत और भूटान के बीच अपने सामरिक हितों के संबंध में साझी समझ है और वह सुरक्षा मुद्दों तथा सीमा प्रबंधन पर घनिष्ठ सहयोग करते हैं।
  • हम यह सुनिश्चित करने के संबंध में भूटान की प्रतिबद्धता और ठोस प्रयासों की सराहना करते हैं , कि भूटान के क्षेत्रों का उपयोग भारतीय हितों के प्रतिकूल कार्य करने वाली ताकतों के लिए नहीं किया जाएगा।
  • भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक और विकास भागीदार तथा उनके लिए आवश्यक अधिकाश अनिवार्य पुण्य की आपूर्ति का स्रोत भी है।
  • आज जब भूटान अपने लोगों को सूचना प्रौद्योगिकी के युग में प्रवेश करने के लिए तैयार कर रहा है, यह कृषि तथा बिजली जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर पर्यटन आईटी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर रहा है तो साथ ही साथ यह पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक और व्यावसायिक भागीदारी के लिए पर्याप्त संभावनाओं का भी प्रयास कर रहा है।
  • भूटान में पनबिजली विकास हमारे द्विपक्षीय सहयोग का केंद्रीय तत्व रहा है ।
  • यह एक अनुकरणीय भागीदारी है जिससे दोनों ही देशों के लिए लाभ की स्थिति बनती है ।
  • पन बिजली परियोजनाओं से उत्पादन आधिक्य  विद्युत का निर्यात भारत में किया जाता है और इससे भूटान को निरंतर राजस्व प्राप्त होता है तथा भारत को स्वच्छ बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
  • इस क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं जिन्हें प्राप्त किया जाना है क्योंकि भूटान की अनुमानित 30000 मेगा वाट (तकनीकी रूप एवं आर्थिक रूप से 20000 मेगावाट व्यवहार्य है) क्षमता में से अभी काफी कुछ प्राप्त किया जाना है।
  • अब तक सिर्फ 14000 मेगावाट विद्युत क्षमताओं का ही उपयोग किया जा सका है ।
  • दोनों देशों ने वर्ष 2020 तक 10000 मेगा वाट क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 10 पनबिजली परियोजनाओं की पहचान की है।
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