पोलैंड में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के लिए लगभग 200 देश 2015 पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते को लागू करने के लिए नियमों पर सहमत हो गए हैं। पेरिस समझौता 2020 से लागू होगा।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन को सीओपी-24 के नाम से भी जाना जाता है। सीओपी-24 के अध्यक्ष माइकल कुर्टिका हैं।
ऐसे हुई शुरुआत
जलवायु परिवर्तन पर लगाम लगाने के लिए सबसे पहले 1992 में रियो डी जनेरियो में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा ‘पृथ्वी सम्मलेन’ का आयोजन किया गया। इस सम्मलेन में यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसी) का गठन हुआ।
इसके गठन का उद्देश्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना, क्योंकि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं हो रहा है इस वजह से धरती का तापमान बढ़ता ही जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव फसलों के उत्पादन, ग्लेशियर्स, कोरल रीफ आदि पर पड़ रहा है।
इन देशों के सम्मलेन को ‘कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज’ (सीओपी) कहा जाता है।
बता दें, दिसम्बर, 2015 में पेरिस में सीओपी की 21वीं बैठक हुई थी जिसमे कार्बन उत्सर्जन में कटौती करके वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखना, जबकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के आदर्श लक्ष्य को पाना है।
एक स्टडी के अनुसार 1750 से अब तक यानी इंडस्ट्रीलाइजेशन की शुरुआत के बाद धरती के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो चुकी है। धरती के तापमान में हो रही इसी बढ़ोतरी को ‘ग्लोबल वार्मिंग’ कहते हैं।