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हिंदी भाषा का विकास क्रम
भारत में चार प्रकार के भाषाएं भारोपीय, द्रविड़, ऑस्ट्रिक व चीनी -तिब्बती बोली जाती हैं भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के आधार पर भारोपीय परिवार सबसे बड़ा भाषा परिवार है जिसके बोलने वालों का सर्वाधिक प्रतिशत लगभग 73% है सबसे कम बोलने वाले लोग चीनी तिब्बती परिवार के हैं जिनका प्रतिशत 0.7% है।
भाषा परिवार के आधार पर हिंदी भाषा पार्वती परिवार की भाषा है जिसके विकास को भारत में 3 कालो में विभक्त किया जा सकता है।
हिंदी की आदि जननी संस्कृत है। संस्कृत , पालि, प्राकृत भाषा से होती हुई अपभ्रंश तक पहुँचती है। फिर अपभ्रंश , अवहट्ट से गुजरती हुई प्राचीन /प्रारंभिक हिंदी का रूप लेती है। सामान्यता , हिंदी भाषा के इतिहास का आरम्भ अपभ्रंश से माना जा सकता है।
अपभ्रंश भाषा का विकास 500 ईसवी से लेकर 1000 ईस्वी के मध्य हुआ माना जा सकता है इसमें साहित्य का आरंभ आठवीं सदी से हुआ और 13वीं सदी तक जारी रहा।
अव्हट्ट, अपभ्रष्ट शब्द का विकृत रूप है इसे अपभ्रंश का अपभ्रंश या परवर्ती अपभ्रंश कहा जा सकता है ।अवहट, अपभ्रंश और आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के बीच की संक्रमण कालीन भाषा है इसका कालखंड 900 ईसवी से 1100 तक निर्धारित किया जा सकता है वैसे साहित्य में इसका प्रयोग 14वीं सदी तक होता रहा है।
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