किसी विलयन कि अम्लीय और छारीय के ज्ञान के लिए बिलियन की उपस्थिति एच आयन तथा ओ एच आयन का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है तो विलयन का उदासीन होता है यदि यह आयन की सांद्रता बढ़ती है तो वह अम्लीय होने लगता है और यदि सांद्रता घटती है तो वह क्षारीय होने लगता है।
पीएच मान - हाइड्रोजन का विभव - इसकी खोज 1909 ईस्वी में सोरेन्सन नाम का एक वैज्ञानिक ने किया था किसी विलेन कि अम्लीय तथा क्षारीय के ज्ञान के लिए जिस मूल्य की उपयोग किया जाता है उसे पीएच मान ने कहा जाता है ।
सफर सलूशन - इस प्रकार के विलियन में मर्द और क्षार मिलने पर इनके पीएच मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है जैसे बिलयन एल्कोहल बनाते समय कागज तथा विद्युत लेपन करते समय बनाया जाता है।
पीएच मान के स्केल पर बीच में उदासीनीकरण होता है जो 7 से दर्शाया जाता है जीरो के बढ़ती संख्या को अम्लीयता तथा घटती संख्या को क्षारीयता से दर्शाया जाता है इसकी खोज 1989 में सोरेनसन नाम के वैज्ञानिक ने किया था जिसे पीएच मान कहा गया पीएच स्केल पर इस प्रकार होता है जैसा कि ऊपर लिखा गया है औरहम इससे किसी बिलियन कि अम्लीयता व क्षारीयता का पता लगाते हैं।