गुप्त काल से पहले मुख्य वास्तुकला केवल स्तूप,उनके द्वार मार्ग एवं रेलिंग के अतिरिक्त कृत्रिम गुफाओं तक ही सीमित थी। इन गुफाओं का धार्मिक उद्देश्यों के लिए निर्माण किया जाता था, प्रारंभ में गुफाओं के जो स्वरुप मिलते हैं उनसे पता चलता है कि पहले लकड़ी द्वारा निर्मित गुफा ही बनती थी। जो धार्मिक कार्यक्रम स्थलों के लिए होती थी ,उनके आसपास घास फूस की झोपड़ी होती थी ।प्रारंभ में 2 गुफाएं बाराबर (गया के निकट) में और नागार्जुन की पहाड़ियों में स्थित है। यह बिल्कुल सच है गुफाओं की भीतरी दीवारों चित्र से पुती हुई है जिसे निसंदेह की पुताई करने वाले कर्मचारियों के स्कूल ने ही किया होगा।
बाद में गुफा मंदिर और गुफा में भारत के कई भागों में पाए गए, किंतु पश्चिमी दक्षिण भारत में ही यह सबसे अधिक संख्या में गुफा मंदिर मठ मिले जिनका निर्माण सातवाहन साम्राज्य और उनके बाद के वंशजों ने किया था। जिन गुफाओं का उत्खनन किया गया उनमें यह गुफाएं ही सबसे बड़ी और सबसे प्रसिद्ध गुफाएं है। प्रारंभ में भारत में पत्थर काट कर जो बनी, में अशोक और उसके पुत्र दशरथ के समय बनाई गई थी। बहरहाल इस पत्थरजनित वास्तु कला को अशोक ने ही अपनाया और उसका विकास किया। इनको प्रभावकारी ढंग से और लोकप्रिय शैली के रूप में विकसित किया।