आजाद हिंद फौज (द्वितीय चरण)

आजाद हिंद फौज का द्वितीय चरण 2 जुलाई 1983 को सुभाष चंद्र बोस के सिंगापुर पहुंचने पर प्रारंभ हुआ। इससे पहले गांधी जी से मतभेद होने के कारण सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था, तथा 1940 में फारवर्ड ब्लाक के नाम से एक नए दल का गठन कर लिया था। मार्च 1941 में हुए भारत से भाग निकले, जहां उन्हें नजरबंद बनाकर रखा गया था। भारत से पलायन के पश्चात उन्होंने रूसी नेताओं से मुलाकात कर ब्रिटेन के विरुद्ध सहायता देने की मांग की ।जब 1941 में सोवियत संघ भी मित्र राष्ट्रों की ओर से युद्ध में सम्मिलित हो गया। तो सुभाष चंद्र बोस जर्मनी चले गए। तत्पश्चात वहां से फरवरी 1943 में जापान पहुंचे। उन्होंने जापान से ब्रिटेन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष प्रारंभ की मांग की। जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर पहुंचे। जहां रासबिहारी बोस एवं अन्य लोगों ने उनकी मदद की। यहां दक्षिण पूर्व एशिया में निवास करने वाले भारतीय तथा बर्मा, मलाया एवं सिंगापुर के भारतीय युद्ध बंदियों ने उन्हें महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाई। अक्टूबर 1946 में उन्होंने सिंगापुर में भारतीय सरकार का गठन किया। सिंगापुर में भी इसका मुख्यालय बनाया गया। धुरी राष्ट्रों ने सरकार को मान्यता प्रदान कर दी। सैनिकों को प्रशिक्षण दिया गया तथा फौज के लिए धन एकत्रित किया गया। नागरिकों को भी सेना में भर्ती किया गया। स्त्री सैनिकों का भी एक बड़ा दल बना बनाया गया, तथा उसे रानी झांसी रेजीमेंट नाम दिया गया। जुलाई 1944 में सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी से भारत की स्वाधीनता के अंतिम युद्ध के लिए आशीर्वाद मांगा। शाहनवाज के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज की एक बटालियन जापानी फौज के साथ भारत बर्मा सीमा पर हमले में भाग लेने के लिए इंफाल भेजी गई। यहां भारतीय सैनिकों से दुर्व्यवहार किया गया। उन्हें ना केवल रसद एवं हथियारों से वंचित रखा गया अपितु जापानी सैनिको के निम्न काम करने के लिए भी बाध्य किया गया। भारतीय सैनिकों का मनोबल टूट गया, तथा जापानी सैनिकों के पीछे लौटने से इस बात की उम्मीद समाप्त हो गई कि आजाद हिंद फौज भारत को स्वाधीनता दिला सकती है। जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण करने के पश्चात जब आजाद हिंद फौज के सैनिकों को युद्ध बंदी के रूप में भारत लाया गया तथा उन्हें कठोर दंड देने का प्रयास किया गया तो भारत में उनके बचाव में एक सशक्त जन आंदोलन प्रारंभ हो गया।
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