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वहीं जब ये विभाजन किया जा रहा था तो उस वक्त सिख समुदाय के लोगों को भी ये एहसास हुआ की उनकों भी अपना एक वतन चाहिए ।
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जिसके परिणामस्वरूप अकाली दल की अगुवाई साल 1950 में सूबा आंदोलन चलाया गया ।
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इस आंदोलन के जरिए अकाली दल ने पंजाबी बहुमत राज्य (सूबा) को बनाने की मांग की ।लेकिन भारत सरकार ने अकाली दल की इस मांग को मानने से इंकार कर दिया ।
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ये आंदोलन यहां पर ही खत्म नहीं हुआ ।कहा जाता है कि साल 1966 में भारत सरकार पंजाब राज्य को भारत से अलग करने की मांग पर राजी हो गई थी । उस वक्त की सरकार ने निर्णय लिया था कि वो पंजाब राज्य को अलग कर देगी ।
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हिमाचल और हरियाणा भारत का ही हिस्सा रहेंगे लेकिन अकालियों ने सरकार के इस फैसले से सहमति नहीं जताई और उन्होंने मांग की कि चंडीगढ़ को पंजाब में मिला दिया जाए । पंजाब की नदियों पर केवल उनका ही अधिकार होगा और हरियाणा और राजस्थान का इन नदियों पर कोई अधिकार नहीं होगा ।
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साल 1978 में आनंदपुर साहिब संकल्प’ लिया गया जिसमें अकालियों ने जगजीत सिंह चौहान के साथ मिलकर अपनी इन मांग को तैयार किया ।