असहयोग आन्दोलन-

सन 1920 एसबी में कांग्रेस ने पहले कोलकाता के अपने विशिष्ट अधिवेशन में और फिर नागपुर में 1920 इसवी के अंत में आयोजित अपने नियमित अधिवेशन में गांधी जी के नेतृत्व में सरकार के विरुद्ध संघर्ष की एक नई योजना स्वीकार की नागपुर अधिवेशन में करीब 15000 प्रतिनिधि शामिल हुए इस अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में संशोधन किया गया सभी न्याय उचित और शांति में साधनों से भारतीय जनता द्वारा स्वराज प्राप्त करना कांग्रेस के संविधान के प्रथम धारा बन गई थी इन साधनों द्वारा किए जाने वाले संघर्ष को असहयोग आंदोलन का नाम दिया गया लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुए कोलकाता अधिवेशन में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ इस आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों द्वारा शिक्षण संस्थाओं का बहिष्कार किया गयाएसबी 1921 ईस्वी को प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन पर संपूर्ण भारत में सार्वजनिक हड़ताल का आयोजन किया गया इस आंदोलन का लक्ष्य था पंजाब और तुर्की के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करना और स्वराज प्राप्त करना इसकी शुरुआत ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई सर और अन्य पदों को त्यागने तथा गांधीजी ने 1920 कैसर ए हिंद  लौटा दिया इसके बाद विधान परिषदों का बहिष्कार शुरू हुआ जब परिषदों के लिए चुनाव हुए तो अधिकांश लोगों ने वोट डालने से इंकार कर दिया विद्यार्थियों और अध्यापकों ने स्कूल कॉलेज छोड़ दिए राष्ट्रवादी ओं ने दिल्ली में जामिया मिलिया और वाराणसी में काशी विद्यापीठ जैसे नई शिक्षण संस्थाएं स्थापित की लोगों ने अपनी सरकारी नौकरियां छोड़ दी वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार किया सारे देश में हड़ताल हुई 1921 ईसवी का वर्ष समाप्त होने के पहले ही 30000 लोग जेलों में बंद हो गए केरल के कुछ भागों में विद्रोह भड़क उठा अधिकांश विद्रोही मोपला किसान थे इसलिए इसे मोपला विद्रोह कहते हैं विद्रोह को बर्बरता पूर्वक कुचल दिया गया दो हजार से अधिक मोपला किसान मारे गए और करीब 45000 को बंदी बनाया गया सन् 1921 ईस्वी में कांग्रेस का अधिवेशन अहमदाबाद में हुआ हकीम अजमल खान इसके अध्यक्ष थे अधिवेशन ने आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया और तब असहयोग आंदोलन का अंतिम दौर आरंभ हुआ गांधी जी ने गुजरात के बारदोली नामक स्थान पर यह आंदोलन शुरू किया और गांधीजी ने सदैव इस बात पर जोर दिया कि समूचा आंदोलन शांतिपूर्ण होना चाहिए।
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