अम्ल - ऐसे योगिक जो किसी घोल या जल में वियोजित होकर एच प्लस आयन उत्पन्न करते हैं और प्रयोगशाला में नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं।तथा इसमें प्रोटान त्यागने की क्षमता होती है तथा इसका स्वाद खट्टा होता है अम्ल कहलाता है कुछ अम्लो के नाम इस प्रकार हैं । जैसे - लैक्टिक अम्ल, एसिटिक अम्ल, टारटरिक अम्ल, साइट्रिक अम्ल, मैलिक अम्ल, ऑक्जेलिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल आदि
क्षार - ऐसे योगिक जो किसी घोल या जल में आयोजित करने पर OH आयन देते हैं और जो प्रयोगशाला में लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं और जिनमें प्रोटॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है और जिसका स्वाद कड़वा होता है वह क्षार कहलाता है कुछ क्षारों के उपयोग इस प्रकार हैं -
Calcium oxide - अनु बुझा चूना इसे कहते हैं इसका प्रयोग ईट जोड़ने कांच बनाने व चाप बनाने में किया जाता है।
Calcium hydroxide - इसी बुझा चुना कहा जाता है इसका प्रयोग घरों की पुताई करने मिट्टी की अम्लीयता दूर करने, चमड़े की खाल से बाल निकालने अम्ल से जलने पर मरहम पट्टी करने, पान तंबाकू बनाने में किया जाता है
मैग्निशियम हाइड्रोक्साइड - इसका प्रयोग पेट की अम्लता दूर करने के लिए प्रति अम्ल का प्रयोग किया जाता है
सोडियम हाइड्रोक्साइड - इसका उपयोग कांच बनाने, दवा बनाने, कपड़े को मुलायम करने, तथा पेट्रोलियम साफ करने, घर व कारखानों को साफ करने व पाउडर बनाने में प्रयोग किया जाता है।