जियो- 5

6 जून 2012 को संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने वैश्विक पर्यावरण आउटलुक नामक रिपोर्ट के पांचवे संस्करण जिओ 5 को जारी किया था। इसे 300 से अधिक विशेषज्ञों ने तैयार किया था। जियो - 5 में वातावरण, भूमि, जल, जैवविविधता, समुद्री प्रदूषण, रसायन और अपशिष्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थायित्व वाले लक्ष्यो के विकास एवं अवरोध दोनों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से चार लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

   महत्वपूर्ण प्रगति का साक्ष्य देने वाले चार लक्ष्य निम्नलिखित हैं :-

  • समुद्री पर्यावरण के प्रदूषण को कम करने हेतु अनुसंधान को बढ़ावा देना, बेेहतर जल आपूर्ति की पहुंच में वृद्धि।
  • ईधन पर से नियंत्रण को परिवर्तित करना।
  • ओजोन परत को क्षीण करने वाले पदार्थों के उत्पादन एवं उपयोग में कमी लाना।
  •  बच्चों के स्वास्थ्य समस्याओं तथा मृत्यु के लिए के लिए वायु प्रदूषण ही कारण है ।
  • मानव स्वास्थ्य समस्याओं की उत्पत्ति के लिए पानी की गुणवत्ता में कमी सर्वाधिक प्रमुख कारण है ।
  • समुद्री पर्यावरण के प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा उसे कम करने अथवा उसकी रोकथाम करने में लगभग ना के बराबर की प्रगति ।
  • आश्चर्यजनक रूप से तटीय मृत क्षेत्रों की संख्या में वृद्धि। 
  • इनमे से कम से कम 415 तटीय क्षेत्रों में गंभीर किस्म की क्षति हुई तथा इनमें केवल 13 तटीय क्षेत्र ही इस  क्षति  से निकल पाए हैं।
  • कीटनाशकों द्वारा जलीय वातावरण के कारण पानी तथा मछली के 90% से अधिक नमूने दूषित हो रहे हैं।
  • इसके कारण विगत 2 दशकों में मछली भंडारण में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई।
  • 1980 के दशक से 20% से अधिक भूमि का उपयोग प्राकृतिक आवास हेतु किया जा चुका है।
  • रिपोर्ट में प्रमुख बिंदुओं पर बल देने की बात कही गई है- वैश्विक समझौता पर मजबूत जवाबदेही क्षमताओं का विकास, नीतियों में नवप्रवर्तन, छोटी व लंबी अवधि के परिवर्तन पर वैश्विक प्रतिक्रिया, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देना, सुशासन दृष्टिकोण, मानव जीवन की जीवनशैली में संशोधन व सुधार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक निवेश।
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