समुद्री एजेंडा

मार्च 2012 में राष्ट्रीय समुद्री विकास कार्यक्रम का स्थान लेने वाली तथा 16,5000 करोड़ रुपए के निवेश वाली नई समुद्री एजेंडा नीति को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करने की घोषणा केंद्र सरकार ने की। इस नीति में जहाजरानी तथा बंदरगाह क्षेत्रों सहित समुद्री क्षेत्र के विकास के सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया है।इसका लक्ष्य बंदरगाहों की क्षमता का विकास तथा जहाज निर्माण के क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी 1% से बढ़कर 5% करना है । इसके प्रमुख लक्ष्य निम्न है :-

  1. वैश्विक समुद्री परिवहन में भारत की हिस्सेदारी 6% से बढ़कर 9% करना।
  2. बंदरगाह की क्षमता को बढ़ाकर 3200 मीट्रिक टन करना।
  3. समुद्री परिवहन को विकसित कर सड़क परिवहन का भार कम करना।
  4. पूर्वी तट पर एक बंदरगाह की स्थापना करना ।
  5. कार्गो संचालन तथा रखरखाव को पुुरी तरह से पंजीकृत करना।
  6. शिपिंग से संबंधित क्षेत्रों की जांच के लिए लोकपाल या प्राधिकरण का गठन।
  7. भारत एवं पड़ोसी देशों के मध्य नौका सेवाएं शुरू करना।
  8. खंभात तथा कच्छ की खाड़ी एवं अन्य उपयुक्त जगहों के लिए पर्यटक नौका सेवा शुरू करना।
  9. जहाज निर्माण उद्योग की आधारभूत दर्शन दर्जा प्रदान करना तथा नई जहाज निर्माण सब्सिडी को प्रारंभ करना।
  10. राष्ट्रीय जलमार्ग 4 एवं 5 का विकास तथा राष्ट्रीय जलमार्ग 3 का विस्तार केरल तक करना।
  11. बराक नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग- 6 घोषित करना।
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