राजस्थान काश्तकारी अधिनियम PART-2

भूमि धारी – भूमि धारी से तात्पर्य राज्य के किसी ऐसे भाग में, उस व्यक्ति से है जो चाहे जिस भी नाम से जाना जाए जो लगान देता है। इसमें निम्न शामिल है-

भू संपत्ति धारी,
उचित लगान दर पर अनुदानग्रहीता,
उप पट्टे की दशा में मुख्य आसामी जिसने भूमि शिकवी- किराए पर उठाई हो,
इजारेदार या ठेकेदार,
साधारणतया प्रत्येक व्यक्ति जो प्रकृष्टधारी है, उन व्यक्तियों के प्रसंग में जो भूमि सीधे उससे लेकर या उसके अधीन धारण करते हैं।
भूमि हीन व्यक्ति – भूमि हीन व्यक्ति से तात्पर्य एक व्यवसाय करने वाले कृषक से हैं जो खुद भूमि काश्त करता है या जिससे उचित रीति से काश्त करने की आशा की जा सकती है परंतु जो अपने खुद के नाम से या अपने सम्मिलित परिवार के किसी सदस्य के नाम से भूमि धारण नहीं करता है।

आदिवासित भूमि- अधिवासित भूमि से तात्पर्य ऐसी भूमि से होगा जो किसी आसामी को कुछ समय के लिए किराए पर दी गई हो एवं उनके कब्जे में हो। इसके अंतर्गत खुदकाश्त भूमि भी सम्मिलित होगी तथा अनधिवासित भूमि से तात्पर्य उस भूमि से होगा जो कब्जे में नहीं है।

लगान- लगान से तात्पर्य उस से होगा जो कुछ भी भूमि को उपयोग या अधिवास या भूमि में किसी अधिकार के लिए नकद या जिंस, अंशतः नकद और अंशत जिंस के रूप में देय और जब तक कोई विपरीत तात्पर्य प्रकट ना हो इसमें शायर सम्मिलित होगा, लगान कहलाता है।

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