राजस्थान काश्तकारी अधिनियम PART-3

मुख्य विशेषताएं

1. एकरूप विधि :: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के प्रभाव में आने से पहले राज्य में विभिन्न क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न विधियां थी सभी विधियों में एकरूपता नहीं थी लेकिन सन् 1955 का यह अधिनियम संपूर्ण राजस्थान राज्य पर लागू हुआ। पूर्व की सभी विधियों को निरस्त कर दिया गया।

2. राज्य की भूमिधारी की हैसियत :: राज्य राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता राज्य की समस्त भूमियों का राज्य में निहित होना। राज्य ही सभी भूमियों का मुख्य भूमिधारी है।

3. पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपबंध :: इस अधिनियम में समाज के पिछड़े वर्गों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के हितों के लिए अनेक प्रावधान किए गए। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की भूमि को सवर्ण के पक्ष में अंतरण किए जाने पर प्रतिबंध लगाया गया।

4. काश्तकारों के प्राथमिक अधिकार :: इस अधिनियम के अध्याय 3 (ग) की धारा 31 से 37 तक में काश्तकारों को अनेक प्राथमिक अधिकार प्रदान किए गए-

निवास के लिए मकान का अधिकार
लिखित पट्टे और प्रतिलेख का अधिकार
पट्टों के रजिस्ट्रीकरण के स्थान पर प्रमाणीकरण का अधिकार
प्रीमियम तथा बेगार का निषेध
लगान से विभिन्न संदाय का निषेध
साम्रग्री के उपयोग का अधिकार
नालबट में अधिकारों की अवाप्ति
न्यायालय की प्रक्रिया द्वारा जब्ती कुर्की तथा विक्रय पर रोक


5. अवैध बेदखली से संरक्षण :: इस अधिनियम की धारा 161 में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि “कोई भी अभिधारी अपने भूमि से क्षेत्र से इस अधिनियम के उपबंधों का अनुसरण करने वाली प्रक्रिया के अलावा अन्य किसी प्रकार से बेदखल नहीं किया जाएगा। अधिनियम के अध्याय 11 में बेदखली के अधारों का उल्लेख किया गया है। उन आधारों के अलावा अन्य किसी आधार पर अभिधारी को बेदखल नहीं किया जा सकता।

6. सुधार की सुविधा :: अधिनियम के अध्याय 6 की धारा 65 से 78 तक में अभिधारियों को अपने भूमि क्षेत्र में सुधार करने का महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किया गया। धारा 65 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि

“राज्य सरकार द्वारा अथवा कोई भी भूमि स्वामी संपूर्ण राज्य की किसी भी भूमि या उस पर प्रभाव डालने वाला कोई सुधार कर सकता है”

7. काश्तकारों के विभिन्न वर्गों की घोषणा :: इस अधिनियम में अभिधारियों के विभिन्न वर्गों की घोषणा की गई

खातेदार अभिधारी
मालिक
खुदकाश्त के अभिधारी
गैर खातेदार अभिधारी
अभिधारियों को विनिर्दिष्ट अधिकार भी प्रदान किए गए हैं। तथा उन्हें संरक्षण भी दिया गया है।

8. अन्य विशेषताएं 

अवैध लगान पर रोक
अतिक्रमण से सुरक्षा
अतिक्रमण के विरुद्ध राजस्व न्यायालयों की अधिकारिता
घोषणात्मक वाद
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित हुआ।
 

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