भारत अफगानिस्तान सम्बन्ध

  • पड़ोसी देश होने के नाते अफगानिस्तान का भारत के लिए स्वाभाविक रूप से महत्व है, किन्तु सबसे बड़ी बात है इस क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन की दृष्टि से इसके महत्व का होना।
  • पाकिस्तान को अफगानिस्तान भी तालिबानीयों का गढ़  मानता है, जिनकी आतंकवादी गतिविधियों ने अफगानिस्तान की आर्थिक स्थिति को तबाह कर दिया है।
  • अफ़गानिस्तान लगातार पाकिस्तान पर तालिबानयों को प्रश्रय एवं प्रशिक्षण देने का आरोप लगाता रहा है ।
  • भारत भी पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों से त्रस्त है, फिर ऐसे समय में, जबकि चीन पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा है, भारत के लिए अफगानिस्तान का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
  • निःसन्देह रूप से जून, 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अफगानिस्तान- यात्रा ने इन संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है।
  • इस दौरान प्रधानमंत्री ने हैैरात राज्य में सलमा बांध का उद्घाटन किया। 42 मेगावाट विद्युत तथा 75000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता वाले इस बांध का निर्माण भारत ने 1700 करोड रुपए की लागत से कराया है।
  • प्रधानमंत्री ने उचित ही इसे अफगानिस्तान-भारत मैत्री बांध कहा है।
  • मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के समय चाबहार बंदरगाह के विकास पर जो समझौता हुआ उसमें अफगानिस्तान भी शामिल है।
  • इस बंदरगाह से स्थल मार्ग अफगानिस्तान से होकर मध्य एशिया  को जाएगा। अभी भारत मध्य एशिया के लिए पाकिस्तान पर निर्भर है। चहबहार के बाद भारत की निर्भरता समाप्त हो जाएगी।
  • भारत और अफगानिस्तान के बीच पाइपलाइन परियोजना पर भी हस्ताक्षर हुए हैं ।
  • इसका उद्देश्य तुर्कमेनिस्तान से अफगानिस्तान पाकिस्तान होते हुए भारत में प्राकृतिक गैस लाना है ।
  • भारत का अफगानिस्तान के आर्थिक पुनर्निर्माण में बड़ा योगदान रहा है।
  • इनमें से प्रमुख है :-
  1.   अफगानिस्तान की संसद भवन का निर्माण ।
  2. काबुल में अस्पताल बनाना।
  3. ईरान की सीमा तक 218 किलोमीटर सड़क का निर्माण।
  4. 220 किलोवाट ट्रांसमीटर का निर्माण।
  5. भारत और अफगानिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं ।
  6. ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री ने जून 2016 में जिस सलमा बांध का उद्घाटन किया है वह चिस्त-ए- शरीफ  के काफी निकट है।
  7. यही ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म हुआ था जिन की दरगाह अजमेर में है।
Posted on by