कुछ महत्वपूर्ण तत्व एवं यौगिक

हाइड्रोजन - हाइड्रोजन दुनिया का सबसे पुराना तत्व है जो सबसे पहले ब्रह्मांड में उत्पन्न हुआ यही एक ऐसा तत्व है जिसके प्रमाण में 1 लीटर और प्रोटीन होता है आजकल प्राकृत में हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक मिलते हैं जिससे प्रोटियम ड्यूटी नियम और एटीएम कहा जाता है ट्रीटीअम का नाभिक भारी होने के कारण यह रेडियोधर्मी हो जाता है। और प्रकृत से नष्ट हो जाता है लेकिन ड्यूटी रियम भारी हाइड्रोजन कहा जाता है। यह एक रंगहीन, गन्धहीन ,स्वादहीन गैस का रूप होता है

इसकी खोज 1931 ईस्वी में अमेरिका के यूरे तथा मर्फी ने किया था आजकल भारी हाइड्रोजन से भारी जल बनाया जाता है

भारी जल - भारी जल की खोज 1932 ईस्वी में यूरे और वाशवर्न ने किया था यह एक रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन द्रव का रूप है इस का गलनांक 3.8 डिग्री सेंटीग्रेड होता है और क्वथनांक 101 डिग्री सेंटीग्रेड होता है सर्वाधिक घनत्व 11.6 डिग्री सेंटीग्रेड होता है तापमान पर होता है यह जल जीव जंतुओं वनस्पतियों के लिए हानिकारक है इसका प्रयोग परमाणु रिएक्टर में मंदक के रूप में किया जाता है भारत में भारी जल का निर्माण नरौरा कोटा बड़ौदा भाखड़ा नांगल टूटीकोरीन कल्चर आदि स्थलों पर किया जाता है और कुछ महत्वपूर्ण तत्व तथा यौगिक होते हैं।

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