बंगाल में भी क्रांतिकारी आतंकवादी संगठित होने लगे और भूमिगत कार्यवाही या करने लगी साथी साथ इनमें से कुछ लोग कांग्रेस संगठन में भी काम करते रहें इससे क्रांतिकारी युवकों को कांग्रेस समर्थक लोगों से संपर्क स्थापित करने का मौका मिला। और दूसरी ओर इन क्रांतिकारियों की मदद से छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में कांग्रेश ने अपना आधार मजबूत बनाया। इन युवा क्रांतिकारियों ने सीआर दास को उनके स्वराजी कार्यों में मदद दी सी आर दास के निधन के बाद बंगाल में नेतृत्व दो खेमों में बट गया 1 के नेता थे सुभाष चंद्र बोस और दूसरे के जी एम सेन गुप्ता ।अंतर्गत सुभाष के साथ हो गया और अनुशीलन गुट जेम सेन गुप्त के साथ ।
क्रांतिकारियों के इन पुनर्गठन गुटों द्वारा शुरू की गई।अनेक कार्यवाहीयो में सबसे उल्लेखनीय थी कोलकाता केे बदनाम कमिश्नर चार्ल्स टेगार्ट की हत्या की कोशिश। जनवरी 1924 में गोपीनाथ शाह ने टेगार्ट की हत्या का प्रयास किया, लेकिन गलती से एक अंग्रेज भी मारा गया सरकार दमन पर उतारू हो गई एक नया अध्यादेश जारी कर ऐसे तमाम लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया जिन पर क्रांतिकारी होने का अधिकारियों का समर्थक होने का शक था। गिरफ्तार व्यक्तियों में सुभाष चंद्र बोस अन्य कांग्रेसी भी थे जनता के तमाम विरोध के बावजूद शाहा को फांसी दे दी गई। इससे क्रांतिकारी गतिविधियों को करारा झटका लगा ।
क्रांतिकारी आतंकवादी गतिविधियों के ठहराव का एक और कारण उसके के बीच आपसी झगड़ा था। चटगांव क्रांतिकारियों का एक गुट जिसके नेता सूर्यसेन थे इसकी काफी सक्रिय भूमिका मेंं थे। सूर्य सेन मृदुभाषी शांत स्वभावशील व्यक्ति थे। शूरसेन ने जल्द ढेर सारी युवा क्रांतिकारियों को अपना समर्थक बना लिया। इन क्रांतिकारियों ने जनता को यह जताने के लिए कि सशस्त्र विद्रोह से अंग्रेजी साम्राज्यवाद को उखाड़ फेंका जा सकता, छोटे पैमाने पर एक विद्रोही कार्रवाई की योजना बनाई इस प्रस्तावित कार्यवाही में चटगांव के 2 शस्त्रागारों पर कब्जा कर हत्यारों को लूटना,नगर की टेलीफोन और टेलीग्राफ संचार व्यवस्था को नष्ट करना और चटगांव और शेष बंगाल के बीच रेल संपर्क को भंग करना शामिल था। बड़ी ही गुप्त और नियोजित ढंग से या योजना बनाई गई थी छोटी से छोटी बातों पर भी खूब विचार-विमर्श किया गया था। नए युवा क्रांतिकारियों के चयन और प्रशिक्षण में पूरी चौकसी बरती गई थी। 18 अप्रैल 1930 को रात के 10:00 बजे इस योजना पर अमल होना था गणेश घोष के नेतृत्व में छह क्रांतिकारियों ने पुलिस शस्त्रागार पर कब्जा कर लिया ये लोग नारा लगा रहे थे इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और गांधी जी का राज कायम हो गया।