फूट डालो और शासन करो कि ब्रिटिश नीति-

प्रत्येक साम्राज्यवादी देश भी जिद देश की जनता में फूट डालकर अपने शासन को बनाए रखता था जनता में मौजूद मतभेदों का लाभ उठाया जाता था एक समुदाय को दूसरे से लड़ा कर एक दूसरे के को समर्थन देकर नए मतभेद पैदा किए जाते थे अंग्रेज और अपने शासन को राजा और जमींदारों के सहयोग से मजबूत स्थिति प्रदान कर रहे थे देश के कई भागों में नई भूमि व्यवस्थाओं के अंतर्गत जमीदारी प्रथा समाप्त हो गई थी 18 57 के विद्रोह को कुचलने के बाद अवध में तालुकदार ओं को जमीन वापस कर दी गई थी अंग्रेजों ने जमींदारों के पुत्र को नौकरी आदि एवं इस प्रकार शिक्षित भारतीयों के साथ मतभेद कम किया भारतीय राज्यों के प्रति अंग्रेजों की नीति जनता को भारतीय राज्यों की जनता और ब्रिटिश भारत की जनता

सैनिक प्रशासन में भी उन्होंने वही नीति अपना  अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी के विद्रोह में हिंदू और मुसलमान कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े थे 1858 के बाद अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों में फुट की नीति अपनाई अंग्रेजों ने मुसलमानों को अपना मुख्य शत्रु माना क्योंकि उन्होंने अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी के विद्रोह के लिए जिम्मेदार समझाया गया नौकरियां देने के लिए उनके साथ भेदभाव किया गया अंग्रेजों ने इतिहास की अपनी पुस्तकों में यह दिखाने की कोशिश की कि मुसलमानों ने हिंदुओं का दमन किया इसलिए हिंदुओं का हित इसी में है कि वे ब्रिटिश शासन का समर्थन करें बाद में उन्होंने अपनी मुस्लिम विरोधी नीति बदल दी ब्रिटिश सरकार ने हिंदुओं के विरुद्ध उच्च वर्गीय मुसलमानों को सुविधाएं देना प्रारंभ किया लेकिन ब्रिटिश नीति का उद्देश्य वही रहा जो हिंदुओं और मुसलमानों में फुट डालना।

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