भारत में अकाल-

भारत में कई बार अकाल पड़े हैं भारतीय किसानों का पूर्णता मानसून पर आश्रित होना इसका मुख्य कारण था फसल अच्छी आने पर भी वे इतना नहीं बचा पाते थे कि अकाल के दिनों के लिए कुछ सुरक्षित रख सकें जिस वर्ष मानसून नहीं आता उस वर्षा काल पड़ता था अट्ठारह सौ साठ सीसी 1988 के मध्य काल के कुल 20 साल रहे। 19 वीं सदी के उत्तरार्ध में सड़कों में सुधार और रेल मार्ग के निर्माण के कारण अभाव ग्रस्त क्षेत्रों में अनाज पहुंचाने में आसानी हुई फिर भी देश के किसान किसी ना किसी क्षेत्र में अकाल पढ़ते ही रहे वास्तव में यह समस्या थी कि छोटे किसान और मजदूर दिन में दो बार का भोजन भी मुश्किल से जुटा पाते थे वर्षा ना होने पर कम अवधि के लिए भी फसल नहीं होती थी तो उन्हें भुखमरी का सामना करना पड़ता था अकाल के कई तरह पर कई तरह के परिणाम होते थे इन अकालो में  लाखों लोगों की मृत्यु हो गई तथा मवेशियों को भी बड़ी संख्या में मृत्यु हुई प्रत्येक अकाल के बाद कुपोषण और महामारी का फायदा होता गया लोग अकाल ग्रस्त क्षेत्रों को छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए बार-बार अकाल पड़ने के कारण सरकार ने अकाल आयोग की स्थापना की उनकी सिफारिशों को मान मान कर सरकार ने 18 83 ईसवी में एक करोड़ 1500000 रुपए की राहत कार्य और बीमा के लिए प्रतिवर्ष देने का निर्णय के प्रशासक के मार्गदर्शन के लिए अकाल संहिता का भी निर्माण किया गया।
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