शब्द भेद / kinds of words

स्रोत/इतिहास के आधार पर -

इतिहास के आधार पर शब्द पांच प्रकार के होते हैं।

1. तत्सम - तत्सम शब्द का अर्थ है उसके सामान अर्थात संस्कृत के समान, हिंदी में अनेक शब्द संस्कृत भाषा से सीधे आए हुए हैं और आज भी उसी रूप में प्रयोग किए जाते हैं अतः संस्कृत के इस प्रकार के शब्द तत्सम शब्द कहलाते हैं जैसे अग्नि, वायु, माता- पिता, प्रकाश, सूर्य आदि यह सभी शब्द संस्कृत में भी इसी प्रकार बोले जाते हैं।

2. तद्भव शब्द - तद्भव शब्द का शाब्दिक अर्थ है उससे प्राप्त होना अर्थात संस्कृत के शब्दों से विकृत होकर बने नए शब्द। हिंदी में अनेक शब्द ऐसे हैं जो निकले तो संस्कृत भाषा से हैं लेकिन उनमें धीरे-धीरे कुछ परिवर्तन हो गया है अतः संस्कृत के जो शब्द प्राकृत, अपभ्रंश, पुरानी हिंदी से गुजरने के कारण आज परिवर्तित रूप में मिलते हैं तद्भव शब्द कहलाते हैं जैसे उज्जवल का उजला, संध्या का सांझ, हस्त का हाथ हो गया है।

3. देशज/देशी - ऐसे शब्द जो क्षेत्रीय प्रभाव के कारण, परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हो गए हैं देशज शब्द कहलाते हैं जैसे थैला, पेट, पगड़ी, लोटा आदि।

4. विदेश/विदेशी/आगत - ऐसे शब्द जो विदेशी भाषा से संबंधित हो, हिंदी में अनेक ऐसे शब्द हैं जो विदेशी मूल के हैं अन्य देशों की भाषा से आए हुए शब्द विदेशज शब्द कहलाते हैं विदेशी शब्दों में से कुछ को ज्यों का त्यों अपना लिया गया है जैसे आर्डर, कंपनी, क्रिकेट, इतिहास और कुछ को हिंदी करण करके अपनाया गया है।

5. संकर - विभिन्न स्रोतों से आए हुए शब्दों के मेल से बने नए शब्द संकर शब्द कहलाते हैं जैसे छाया + दार छायादार, इसमें छाया संस्कृत शब्द है जबकि धार फारसी शब्द है इसी प्रकार रेलगाड़ी में रेल अंग्रेजी शब्द है जबकि गाड़ी हिंदी शब्द है इस प्रकार के शब्द संकर शब्द कहलाते हैं।

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