मुगल साम्राज्य के संदर्भ में अकबर की नई विचार पद्धति की परिपक्वता का परिचायक उसके द्वारा 1583 में एक नए कैलेंडर इलाही संवत का जारी करना है ।अकबर की मुद्राओं से भी इसकी पुष्टि होती है 1583 से पहले उसकी मुद्राओं पर कलमा तथा खलीफा ओं के नाम और विशेषताओं का विवरण होता था किंतु इलाही संवत के प्रतिपादन के पश्चात अकबर की मुद्राओं में उपर्युक्त दोनों विशेषताएं दिखाई नहीं पड़ती इस काल की मुद्राओं में अरबी की आयत का यह अंश उत्कीर्ण किया गया है: अल्लाह हू अकबर।
1583 के पश्चात की मुद्राओं की एक विशेषता यह भी है कि उनमें सूर्य एवं चंद्रमा की महिमा का बखान करने वाले पद्य अंकित हैं उदाहरण के लिए अकबर शाह की मुद्रा पर अंकित सूर्य स्वर्ण की महिमा है जबकि पृथ्वी तथा आकाश चमकते हुए सूर्य से प्रकाशित है।
अकबर के धार्मिक विचार तथा संस्थाएं उन समस्याओं के समाधान के रूप में सामने आई जिनका अकबर को मुगल साम्राज्य की स्थापना का आधार प्रदान करने के दौरान करना पड़ा था। अबुल फजल द्वारा अकबर के विचारों के परिपेक्ष में जिन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया उनसे उसके उद्देश्य दृष्टिकोण भली-भांति निरूपित होते थे उनके द्वारा एक और सुलह ए कुल यह अलौौकिक शांति मुगल साम्राज्य की सर्व प्रमुख नीति बनी रही तो दूसरी ओर आध्यात्मिक क्षेत्रों में मुगल बादशाहो व विशेष रूप से अकबर की विशिष्ट स्थित की भी पुष्टि हुई