विलियम हॉकिंस

हॉकिंस एक व्यापारी था और ईस्ट इंडिया कंपनी का कर्मचारी था वह भारत में 1608 से 1613 तक ठहरा व फारसी भाषा के एक बहुत अच्छा ज्ञाता था और वह जहांगीर द्वारा दी गई शराब की पार्टियों में आमंत्रित किया जाता था जहांगीर उससे बहुत प्रभावित था।

हॉकिंस के विवरण का महत्व इसलिए है कि उसने प्रत्यक्षदर्शी के रूप में सब कुछ लिखा है विशेष रूप से जहांगीर के व्यक्तित्व तथा दिनचर्या के विषय में उसका विवरण अत्यंत विश्वसनीय है। बादशाह को जवाहरातों का शौक था किस दिन कौन कौन से है और कितनी मात्रा में हीरे जवाहरात पहनने है इस हिसाब से वे विभाजित थे यहां तक कि उसकी तस्वीर माला की भी कीमती मोती, माणिक की हीरे ,पन्ने और की बनी होती थी दैनिक प्रार्थना के बाद जहांगीर बाहर आकर झरोखा दर्शन देता था 3:00 बजे के करीब दरबार ए आम लगाता था वह सारे मामलों की सुनवाई के लिए वहां 2 घंटे ठहरता था फिर दरबारे ख़ास में चला जाता था जहां केवल वही लोग आ सकते थे जो बादशाह के खास थे।

हॉकिंस ने बादशाह की संपत्ति का विवरण दिया है उसमें उसने सारी वस्तुयें गिनाई हैं जैसे हीरे जवाहरात, अस्त्र शस्त्र ,कीमती बर्तन जिनमें कटोरे शराब पीने के प्याले आदि शामिल थे। उसने शाही पशुओं के बारे में लिखा है जिनमें हाथियों और फारसी तुर्की तथा कश्मीरी घोड़ो का वर्णन है।

जहांगीर के हरम का दैनिक खर्च लगभग ₹30000 था। दरबार और दरबारी कानूनों का विस्तार से वर्णन किया है बादशाह खजाने और शेरों को छोड़कर अन्य सभी का प्रतिदिन निरीक्षण करता था जब कोई अमीर मर जाता था तो उसकी सारी संपत्ति पर बादशाह का अधिकार हो जाता था। किंतु उसके बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करता था ।आगरा में उसकी अनुमति के बिना कोई स्त्री सती नहीं हो सकती थी।

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