प्रश्न-: चार्टिस्ट आंदोलन राजनीतिक सुधारों के वेश में सामाजिक क्रांति का पर्यटन था। व्याख्या करें?
उत्तर-: चार्टिस्ट आंदोलन ब्रिटेन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है यह श्रमिक आंदोलन था, जिसे चार्टिस्ट नाम दिया गया। यह सामाजिक आर्थिक कठिनाइयों पर आधारित एक राजनीतिक आंदोलन था जिसका अंतिम उद्देश्य सामाजिक सुधार लाना था जो राजनीतिक अधिकारों द्वारा ही संभव था अतः राजनैतिक मांगी मांगी गई ।
जहां एक तरफ 1932 में मध्य वर्ग को राजनीतिक अधिकार प्रदान किए गए वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक क्रांति से पहले आर्थिक दुर्दशा और असमानता से गरीब एवं मजदूर वर्ग शोषित हो रहे थे इसी कारण वर्ष 1938 में मजदूरों की एक सभा में 6 सूत्री मांगे रखी जो निम्नलिखित हैं-
- वयस्क मताधिकार।
- गुप्त मतदान।
- संसद सदस्यता के लिए संपत्ति की योगिता को समाप्त करना।
- समान निर्वाचित क्षेत्र।
- संसद सदस्यों को वेतन देना ।
- संसद का चुनाव प्रतिवर्ष कराना।
दर असल इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति ने इंग्लैंड की सामाजिक व्यवस्था को परिवर्तित कर दिया परिणाम स्वरूप अमीर और अमीर होते गए तथा गरीब और गरीब होते गए, इसका कारण था कि औद्योगिक क्रांति का लाभ कुछ वर्गों तक ही सीमित रहा था तथा अमीर-गरीब की खाई इतनी बढ़ गई कि देश के अंदर दो राष्ट्रों जैसा प्रतीत होने लगा। जिसमें विभिन्न वर्गों के बीच सहानुभूति नहीं थी अतः जनाक्रोश ने आंदोलन का रूप ले लिया तथा इसकी अभिव्यक्ति राजनीतिक मांगों के रूप में हुई, जो सहज ही था।
लेकिन इस आंदोलन के दूरगामी सकारात्मक परिणामों के बावजूद इस आंदोलन को कई मायनों पर असफल करार दिया गया। जैसे- आंदोलनकारियों का आंदोलन की क्रियान्वयन होने को लेकर एकमत न होना, कुछ इसे शांतिपूर्ण तरीके से चलाना चाहते थे तथा कुछ इसे हिंसक तरीके से। साधनों का अपर्याप्त तथा अनुचित तरीकों का प्रयोग करना जैसे - जाली हस्ताक्षर आदि, दंगों के कारण जनता का जुड़ाव कम हुआ, तत्कालिक मांगे यानि खाद्य पूर्ति वस्तुओं के दाम कम होना इत्यादि की पूर्ति हो जाने से आंदोलन ठंडा पड़ जाना आदि।
यद्दापि यह आंदोलन असफल रहा लेकिन महत्वहीन नहीं कहा जा सकता है क्योंकि यह अपने सिद्धांतों में मौलिक तथा उद्देश्यों में व्यापक था यही कारण है कि कालांतर में इसकी अधिकांश मांगे मान ली गई अतः यह आर्थिक सामाजिक तथा राजनीतिक तीनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।