राजस्थान काश्तकारी अधिनियम PART- 4

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 14 मे काश्तकार को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है

खातेदार
मालिक
खुदकाश्त आसामी
गैर खातेदार
1. खातेदार :- खातेदार के स्पष्ट परिभाषा काश्तकारी अधिनियम में कहीं भी नहीं है खातेदार का शाब्दिक अर्थ है जिस व्यक्ति के नाम कृषि भूमि का खाता है वह खातेदार है कृषि भूमि के संबंध में भूमि धारक राज्य सरकार है तथा जिस व्यक्ति के नाम कृषि भूमि संबंधी खाता है वह खातेदार है

काश्तकारी अधिनियम की धारा 15 के अनुसार तीन अवस्था में खातेदारी अधिकार प्राप्त होते हैं राजस्थान काश्तकारी अधिनियम लागू होने से पूर्व जो व्यक्ति टिनेंट या खातेदारी की हैसियत रखता था वह खातेदार है दूसरा व्यक्ति भी खातेदार हो गया काश्तकारी अधिनियम लागू होने के बाद खातेदार था तीसरे वह व्यक्ति खातेदार है जिन्हें खातिरदारी अधिनियम जागीर नियम या किसी नियम के अंतर्गत खातेदारी अधिकार प्राप्त हो गए हो



2. मालिक :- राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 5(26कक)एवं धारा 17(क) से अभिप्राय ऐसे बिसवेदार या जमीदार से है जो जमीदार या बिसवेदारी ऐबोलिशन एक्ट 1559 के अंतर्गत भू संपत्ति राज्य सरकार में निहित हो जाने के कारण धारा 29 के अनुसार मालिक हो जाता है मालिक एवं खातेदार एक समान ही है | पहले जो बिसवेदार, जमींदार खुदकाश्त ,भूमि पर कृषि करता था अब मालिका खातेदार मान लिया गया है |

3. खुदकाश्त ( आसामी ) – काश्तकारी अधिनियम की धारा 5(23) के अनुसार खुदकाश्त से अभिप्राय राज्य के किसी भी भाग में खुदकाश्त से अभिप्राय ऐसे भू संपदा धारी से होगा जो भूमि को खुदकाश्त करता है|

ऐसी भूमि जो इस अधिनियम के आरंभ में खुदकाश्त ,सीर ,हवाला, निजी जोत घर खेड़ा के रूप में दर्ज की गई थी अथवा वह भूमि जो उक्त नियम के प्रारंभ के बाद किसी कानून के अंतर्गत खुदकाश्त के लिए आवंटित भूमि में शामिल हो खुदकाश्त का अभिप्राय ऐसी भूमि धारक से है जो भूमि पर किसी अन्य से काश्त न करवा कर स्वयं काश्त करता है |

खुदकाश्त का का अधिकार ,विभाजन बक्शीस द्वारा ही अंतरण हो सकता है| खातेदारी अधिनियम लागू होने पर खुदकाश्त आसामी भी खातेदार आसामी हो गए है!

4. गैर खातेदार :- राज्य के किसी भी भाग में गैर खातेदार वह है जो खातेदार आसामी खुदकाश्त आसामी या शीकमी आसामी से भिन्न है वह खातेदार है| भूमि आवंटन नियम 1970 एवं अन्य आवंटन नियमों के अंतर्गत कृषि भूमि का आवंटन हुआ है वह काश्त कर खातेदारी अधिकार मिलने से पहले तक गैर खातेदार आसामी है|

खातेदार के अधिकार

काश्तकारी अधिनियम की धारा 31 से 37 तक बताये गई भूमि सुविधा के अधिकार प्राप्त है|
खातेदार की मृत्यु के पश्चात उत्तराधिकारी को खातेदार के अधिकार प्राप्त करने का अधिकार है|
खातेदार अपनी भूमि का विक्रय ,दान, रहन या वसीयत कर सकता है|
खातेदार अपनी भूमि की अदला-बदली कर सकता है|
खातेदार को भूमि बटवारे का अधिकार प्राप्त है|
खातेदार को अपनी भूमि त्याग (सरेंडर) का अधिकार प्राप्त है|
खातेदार को अपनी भूमि में सुधार का अधिकार है
खातेदार अपनी भूमि में घोषणात्मक ला सकता है|
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