भारतीय राजाओं के प्रति ब्रिटिश नीति-

सन अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी में ब्रिटिश सरकार ने अपने शासन को मजबूत बनाने के लिए उद्देश्य से भारतीय राजाओं को बनाए रखने के लिए अपनाएं महारानी की घोषणा में वादा किया गया कि भारत में ब्रिटिश इलाकों का विस्तार नहीं किया गया भारतीय राजाओं के अधिकारों और उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान किया जाएगा भारत की ब्रिटिश सरकार ने इन राज्यों को अपना सहयोगी मान लिया कई जागीरदार ओं खोज राजा का दर्जा दे दिया गया भारत में उस समय 562 रजवाड़े थे जिनमें से कई राज्य बहुत छोटे थे कुछ का क्षेत्रफल लगभग 1 वर्ग किलोमीटर था तथा बाद इससे भी कम थी कश्मीर और हैदराबाद जैसे बड़े राज्य क्षेत्रफल में ब्रिटेन के बराबर थी के बाद ब्रिटिश भारत सरकार के जरिए ब्रिटिश शासन करते थे तथा दूसरा भारतीय राजन पर भारतीय राज्य शासन करते थे

सन अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी के पूर्व भारत में ब्रिटिश शासन और भारतीय राज्यों के बीच संबंध इन के बीच हुई संघ के अनुसार अलग-अलग किस्म के थे कुछ अन्य राज्य भारत की ब्रिटिश सरकार के अधीन माने जाते थे 1858 एस बी के बाद संबंध बदल गए जहां एक तरफ एक वादा किया गया कि उन पर कब्जा नहीं किया जाएगा वहीं दूसरी तरफ होने ब्रिटिश सरकार के अधीन बना रहे बनाया गया भारतीय राज्यों को प्रभुसत्ता के सिद्धांत के अंतर्गत ब्रिटिश सरकार के अधीन बनाया गया था भारत में ब्रिटिश सत्ता सर्वोच्च थी भारत में प्रो सत्ता में स्पष्ट रूप से व्यक्त की गई महारानी विक्टोरिया भारत के क्षेत्रों में भी दरबार का आयोजन किया गया दरबार में शामिल हुए राजाओं ने अपने वैभव का अधिक प्रदर्शन किया उसी दरबारसन अट्ठारह सौ महारानी तोरिया की भारत की साम्राज्ञी की पदवी धारण करने की घोषणा की गई।

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