1857 की क्रान्ति-2

20 सितम्बर 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजांे का पुनः अधिकार हो गया। परन्तु संघर्ष मे जान निकलसन मारा गया।

      5 जून सन् 1857 में कानपुर को नाना साहब, तात्याटोपे ने अपने अधिकार में कर लिया-लेकिन अंग्रेज सेनापति कैम्पबेल ने 6 सितम्बर 1857 को कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया।

      बेगम हजरत महल के नेतृत्व में 4 जून 1857 को विद्राहियो ने लखनऊ पर अधिकार कर लिया।

      मार्च 1858ई0 को कैम्पबेल ने लखनऊ के विद्रोह को समाप्त कर लखनऊ पर पुनः कब्जा कर लिया।

      लखनऊ के चीफ कमिश्नर हेनरी लारेन्स रेजीडेन्स की रक्षा करते हुये मारे गये थे।

      झाँसी में विद्रोह का नेतृत्व झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने किया-विद्रोह 1857 में प्रारम्भ हुआ। अंग्रेज सेनापति ह्यूरोज था। अपै्रल 1858 में झाँसी पर पुनः कब्जा हो गया।

      इलाहाबाद मे विद्रोह का नेतृत्व लियाकत अली ने किया जबकि अंग्रेज सेनापति कर्नल नील ने विद्रोह का प्रतिकार किया।

      जगदीशपुर (बिहार) के जमींदार कंुुवर सिंह ने बिहार में अग्रेजों के विरूद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया-अंग्रेज सेनापति विलियम टेलर एवं विसेंट आयर ने जगदीशपुर को पुनः अप्रैल 1858 तक पुनः स्वतंत्र करा लिया।

बरेली              खान बहादुर खाँ

फैजाबाद     मौलवी अहमदउल्ला

फतेहपुर            अजीमुल्ला

      वी0डी0 सावारकर ने 1857 के विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम कहा था।

      बेंजामिन डिज़रायली ने इसे राष्ट्रीय विद्रोह कहा था।

      सरकारी इतिहासकार एस.एस. सेन ने 1857 के विद्रोह पर भारत सरकार के कहने पर म्पहीजममद थ्पजिल ैमअमद नामक पुस्तक लिखी।

      आर0सी0मजूमदार के अनुसार-यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंन्त्रता संग्राम न तो प्रथम था न ही राष्ट्रीय था तथा न ही स्वतन्त्रता संग्राम था।
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