पहला अंग्रेज बिरोधी संघर्ष संन्यासियों के द्वारा शुरू किया गया।
सन्यासी विद्रोह का उल्लेख बंकिम चन्द्र चटर्जी के उपन्यास आनन्दमठ मे किया गया है।
1887 के बाद ब्रिटिश सरकार का रूख कांग्रेस के प्रति कठोर होता चला गया।
कर्जन ने कहा की कांग्रेस अपने पतन की ओर लड़खड़ाते जा रही है।
लार्ड कर्जन ने 20 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा की।
बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 को प्रभावी हुआ-इसी दिन पूरे बंगाल में ‘शोक दिवस’ मनाया गया।
बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 ई0 को कलकत्ता के टाउन हाल में स्वदेशी आन्दोलन की घोषणा की गयी।
1906 में कलकत्ता में कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुये दादा भाई नौरोजी ने पहली बार स्वराज की माँग की।
बालगंगाधर तिलक पहले कांगे्रसी नेता थे जिन्हें कई बार जेल जाना पड़ा ।
प्लेग के समय अव्यवस्था से प्रभावित होकर पूना के चापेकर बंधुओं दामोदर एवं बालकृष्ण ने प्लेग अधिकारी रैंड एवं आयस्र्ट की हत्या कर दी।
बंगाल मे क्रान्तिकारी विचारधाराओं को बारीन्द्र कुमार घोष एवं भूपेन्द्र नाथ दत्त ने फैलाया।
बंगाल में 1907 में अनुशीलन समिति का गठन किया गया जिसके संस्थापक पी0 मित्रा थे, इसका प्रमुख उद्देश्य खून के बदले खून। इसमें वारीन्द्र घोष एव भूपेन्द्र नाथ दत्त भी प्रमुख रहे।
-शेष अगले भाग में