जलियावाला बाग हत्याकांड जाँच के लिये सरकार ने 1919 ई0 में लार्ड हंटर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जिसमें 5 अंग्रेज और तीन भारतीय सर चिमल लाल सीतलवाड़, साहबजादा सुल्लान अहमद एवं जगत नरायण थे।
कांग्रेस ने इस हत्याकाण्ड की जाँच की जिसे मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में एक कमेटी नियुक्ति किया। इसके अन्य सदस्य मोतीलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, अब्बास तैय्यब जी एवं पुपुल जयकर थे।
खिलाफत आन्दोलन भारतीय मुसलमानों का मित्र राष्ट्रों के विरूद्व टर्की के खलीफा के समर्थन में आन्दोलन था।
31 अगस्त को 1920 ई0 का दिन खिलाफत दिवस के रूप में मनाया जाने का निर्णय लिया गया।
23 नवम्बर 1919 ई0 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी (हिन्दू एवं मुस्लमानों की एक संयुक्त कांन्फ्रेन्स) का अधिवेशन हुआ। जिसकी अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की थी।
रौलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग कांड और खिलाफत आन्दोलन के उत्तर में गाँधी जी ने 1 अगस्त 1920 को असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ किया।
असहयोग आन्दोलन की पुष्टि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1920ई0 के नागपुर अधिवेशन मे कर दी।
मुहम्मद अली जिन्ना, एनीबेसेन्ट तथा विपिनचन्द पाल कांग्रेस के असहयोग आन्दोलन से सहमत नही थे और उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी।
5 फरवरी 1922 को घटित चैरी-चैरा कांड के कारण गाँधीजी दुखी होकर 12 फरवरी 1922 को वारदोली प्रस्ताव के द्वारा असहयोग आन्दोलन स्थगित कर दिया।
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