23 वीं राष्ट्रमण्डल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक अर्थात
चोगम (23rd Commonwealth Heads of Government Meeting or CHOGM) 15 से 17 नवम्बर 2013 को श्रीलंका की राजधानी
कोलम्बो में आयोजित किया गया।
पोर्ट ऑफ स्पेन,
त्रिनिदाद और टोबैगो में 2009 को बैठक में सभी
राष्ट्रमण्डलशासनाध्यक्षों ने यह निर्णय लिया गया था कि 2013 की बैठक की मेजबानी श्रीलंका द्वारा की जायेगी। श्रीलंका ने 2011 की बैठक में मेजबानी की उम्मीद जताई थी लेकिन
श्रीलंकाई गृहयुद्ध के दौरान कथित नृशंसता के लिए जाँच के दायरे में आने के कारण यह शिखर सम्मेलन
पर्थ,
ऑस्ट्रेलियामें आयोजित किया गया और
कोलम्बो को 2013 के शिखर सम्मेलन की मेजबानी मिली।
राष्ट्रमण्डल की अध्यक्ष महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का प्रतिनिधित्व कर रहे राजकुमार चार्ल्स ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।
चोगम सम्मेलन का बहिष्कार :-
विभिन्न जन-समूहों की तरफ से देश के तमिल समुदाय के विरुद्ध हुए अत्याचारों और बदहाल मानवाधिकार रिकॉर्ड को देखते हुए चोगम को श्रीलंका में आयोजित न किये जाने के लिए और इसका बहिष्कार करने माँग की। इस सम्मेलन में 53 देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेने पहुँचे जिनका युद्ध के दौरान और बाद में लापता हुए सदस्यों के परिवारों ने विरोध भी किया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के अनुसार श्रीलंकाई राष्ट्रपति राजपक्षे को तमिल टाइगर्स के खिलाफ़ कथित युद्ध अपराधों को लेकर गंभीर सवालों के जवाब देने होंगे। लेकिन बैठक के बाद जारी किए गए घोषणा पत्र में श्रीलंकाई सैन्य बलों के कथित युद्ध अपराधों का कोई जिक्र नहीं किया गया।
भारत, मॉरिशस और कनाडा के शासनाध्यक्षों ने बैठक का बहिष्कार किया। इन देशों का आरोप है कि मंहिदा राजपक्षे के शासन के दौरान श्रीलंका में गृह युद्ध की समाप्ति के अंतिम महीनों में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध हुए थे। भारत में तमिलनाडु विधानसभा ने सम्मेलन से दो दिन पूर्व प्रस्ताव पारित किया जिसमें सम्मेलन का पूरी तरह बहिष्कार करने की मांग की। कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफेन हार्पर ने भी मानव अधिकारों के मसले पर इस सम्मेलन का बहिष्कार किया। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घरेलु विवादों के चलते बैठक में शामील होने में असमर्थता जताई।
श्रीलंका का तर्क :-
उपरोक्त विरोध और बहिष्कार की घोषणाएँ के मध्यनजर श्रीलंका ने तर्क दिया कि उन्होंने केवल पिछले 30 वर्षों से चल रहे गृहयुद्ध को समाप्त कर दिया और वर्तमान में वहाँ किसी भी तरह से मानवाधिकारों का हनन करने वाले के खिलाप कार्रवाही की जायेगी। श्रीलंका के अनुसार मानवाधिकारों का हनन तो तब होता था जब हर रोज एक, दस या पंद्रह शव बरामद किए जाते थे। वरिष्ठ पत्रकार ज्योति मल्होत्रा के अनुसार - "चोगम उन देशों का समूह है जो एक ज़माने में ब्रिटेन के उपनिवेश थे। इस तरह के सम्मेलन का कोई आज की दुनिया में कोई बहुत ज़्यादा महत्व नहीं है क्योंकि ब्रिटेन अब उतना शक्तिशाली नहीं रहा, जितना पहले था। भारत जैसे इतने बड़े मुल्क के प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में नहीं जा रहे हैं। इस सम्मेलन का जो भी नतीजा निकलेगा, वो बड़ा सीमित होगा।"