क्लोरो फ्लोरो कार्बन तथा कार्बन डाइऑक्साइड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां

ये क्लोरीन , क्लोरीन तथा कार्बन तत्वों के साधारण योगिक हैं ।एयर कंडीशनर ,रेफ्रिजरेटर, प्लास्टिक, अग्निशामक तथा प्रसाधन सामग्री आदि से क्लोरो फ्लोरो कार्बन के उत्सर्जन एवं उनके वायुमंडल में पहुंचने के कारण समताप मंडल ओजोन गैस परत का क्षय प्रारंभ हो जाता है ।फलत:

सूर्य की पराबैगनी किरणे अधिक मात्रा में धरातलीय सतह पर पहुंचने लगती हैं जिस कारण तापमान में वृद्धि के कारण कई प्रकार के पर्यावरण में परिवर्तन घटित होने लगते हैं तथा गोरी चमड़ी के लोगों में चर्म कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं

कार्बन डाइऑक्साइड

यह एक महत्वपूर्ण संसाधन है क्योंकि हरे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग से प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना आहार निर्मित करते हैं किंतु कार्बन डाइऑक्साइड का जब वायुमंडल में सांद्रण बढ़ जाता है तो अनेक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं निम्न दो प्रमुख कारणों के फलस्वरूप वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है यथा

  1. बढ़ती दर से जीवाश्म के दहन के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकाधिकमात्रा में वायुमंडल में विमोचन

2. तीव्र गति से वन विनाश के कारण वन क्षेत्रों में विनाश होने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग में निरंतर कमी।

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के सांद्रण में वृद्धि होने से हरित गृह प्रभाव में वृद्धि होती है। जिस कारण निचले वायुमंडल एवं धरातलीय सतह के तापमान में वृद्धि होती है। फलत: वर्षा तथा मृदा - नमी में कमी, महासागरीय जल की अम्लीयता में वृद्धि, हिम टोपियां एवं महाद्वीपीय हिमनद का पिघलना आदि विनाशकारी घटनाएं घटित हो रही है ।ज्ञातव्य है कि ग्रीन हाउस गैसों द्वारा होने वाले वैश्विक तापन में लगभग 60% के लिए कार्बन डाइऑक्साइड ही जिम्मेदार है।

Posted on by