शेरशाह सूरी की देन-

- अपने साम्राज्य के एक छोर से दूसरे छोर तक शांति व्यवस्था की पुनर्स्थापना शेरशाह सूरी के प्रमुख योगदान ओं में गिना जा सकती है शेर शाह ने अपने राज्य में वाणिज्य व्यापार के उत्थान और संचार सुविधाओं के सुधार की ओर से विशेष ध्यान दिया उसने पश्चिम में सिंध नदी से लेकर बंगाल में सुनार कहां तक पहुंचे और पहुंचने वाली पुरानी शाही सड़क जिसे ग्रैंड ट्रंक रोड कहा जाता है उसको पुनः शुरू करवाया जिसे प्राचीन भारत में उत्तर पत्र कहते हैं लॉर्ड डलहौजी ने इसका नाम बदलकर जीटी रोड रखा था वर्तमान में यह nh-1 ,nh-2के नाम से जानी जाती है उसने आगरा से जोधपुर व चित्तौड़ तक एक सड़क भी बनवाई थी एक तीसरी सड़क उसने लाहौर से मुल्तान तक बनवाई थी यात्रियों की सुविधा के लिए उसने इन सड़कों पर दो-दो कोष लगभग 8 किलोमीटर की सराय बनवाई थी अब्बास खान कहता है कि इंसानों का यह नियम था कि जो भी दाखिल होता था उसे सरकार की ओर से अपनी पद प्रतिष्ठा के अनुरूप सुविधाएं भोजन और उसके पास के लिए चारा दिया जाता था शेरशाह सूरी ने बनवाई थी क्योंकि साम्राज्य की धाराएं बाजार बस्ती के रूप में विकसित हुई जिन्हें कहा जाता था सराय का इस्तेमाल सेवाओं के लिए चौकियों के तौर पर भी किया जाता था शेरशाह ने वाणिज्य और व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए और भी सुधार किए उसके पूरे साम्राज्य में व्यापार के माल पर सिर्फ दो स्थानों में चुंगी लगती थी किसी व्यापारी की मृत्यु हो जाने पर लोगों को उसके माल को लावारिस मानकर हथिया लेने की सख्त मनाही थी शेरशाह ने स्पष्ट कर दिया कि किसी व्यापारी की जो भी होगी उसकी जिम्मेदारी मुकदमा और जमींदारों की होगी उसने मिश्र धातु के स्थान पर सोने और चांदी के सिक्के चांदी के सिक्के हुए थे कि उसके बाद भी सदियों तक में चलते रहे थे...
Posted on by