स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन-

स्वदेशी का अर्थ है संघर्ष के दौरान देश में उत्पादित वस्तुओं का इस्तेमाल करना इससे भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और राष्ट्र मजबूत बनता है यह देश भक्ति बढ़ाने का एक प्रभाव कारी तरीका है स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने का भी नारा दिया गया है इस बात पर जोर दिया गया है कि विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने से अधिकांश विदेशी वस्तुएं एक लाइन में से आती है इंग्लैंड के आर्थिक हितों को छत पहुंचेगी और उत्तर ब्रिटिश सरकार को भारतीय मांगे स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सकेगा स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन केवल बंगाल तक सीमित रह कर देश के अनेक भागों में फैल गया है ब्रिटिश कपड़ों चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया लोग झुंड बनाकर दुकानों पर जाते हैं और दुकानदारों से विदेशी सामान बेचने का अनुरोध करते थे वह दुकानों के बाहर खड़े रहकर ग्राहकों से विदेशी सामान अन्ना खरीदने का आग्रह करते थे इस आंदोलन में स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है उन्होंने केवल स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करना शुरू किया और लोगों को प्रेरित किया कि वे विदेशी वस्तुओं का प्रयोग ना करें सरकार ने दमन के कई तरीके आजमाने के विद्यार्थियों को स्कूल कालेजों से निकाल दिया गया कई विद्यार्थियों को पीटा गया और जेल में डाल दिया गया और बहिष्कार आंदोलन के सामान नहीं रहा बल्कि स्वदेशी का अर्थ हो गया हुआ सब जो भारतीय है अंत में बहिष्कार का अर्थ हो गया वह सब जिसका संबंध ब्रिटिश शासन से है..
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