राज्य के नीति निदेशक तत्व तथा क्षेत्रीय परिषदों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ।

1. राज्य के नीति निदेशक तत्व -


भारतीय संविधान निर्माताओं का लक्ष्य भारत में कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना था । भारतीय संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वर्णन है । नीति निदेशक तत्व एक प्रकार से राज्य के लिए नैतिकता के स्रोत हैं, जो देश में वास्तविक रूप से सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं ।
• यह गैर न्यायोचित होते हैं इन्हें कानूनी रूप से न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता ।

2. क्षेत्रीय परिषदें-


क्षेत्रीय परिषदें सांविधिक निकाय हैं, इसका गठन संसद द्वारा अधिनियम (राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956) बनाकर किया गया है । इस कानून ने देश को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया है तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय परिषद का गठन किया गया है गृहमंत्री क्षेत्रीय परिषदों का अध्यक्ष होता है , तथा प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री क्रमानुसार 1 वर्ष की अवधि के लिए परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं । पूर्वोत्तर परिषद् अधिनियम 1971 द्वारा एक नया क्षेत्रीय परिषद पूर्वोत्तर परिषद का गठन किया गया है ।

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