भारत सरकार की विदेश नीति ब्रिटिश सरकार की विदेश नीति का अंग थी 19 वीं सदी का उत्तरार्ध साम्राज्यवादी विस्तार का काल था उपनिवेशन के लिए साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हुई थी अंग्रेजों ने अपने साम्राज्यवादी युद्ध में तथा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए भारतीय संसाधनों और भारतीय सैनिकों का उपयोग किया 19वीं सदी में रूसी साम्राज्य का मध्य एशिया में विस्तार हो रहा था इसलिए इससे अंग्रेज सतर्क हो गए रूसी विस्तार को रोकने के लिए उन्होंने अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाना प्रारंभ कर दिया वे सोचते थे कि अफगानिस्तान में पैर जमाने के बाद मध्य एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने में उन्हें आसानी होगी अफगानिस्तान का राजा दोस्त मोहम्मद एक योग्य शासक था अंग्रेजों ने 1839 अपनी फौज अफगानिस्तान भेजी दोस्त मोहम्मद की सेना को हराया तथा उसके एक विरोधी को गद्दी पर बिठाया साथ ही दोस्त मोहम्मद को बंदी बना कर भारत लाया अफगानिस्तान में अंग्रेजो के हस्तक्षेप के विरुद्ध हुए इसलिए दोस्त मोहम्मद को भी देनी पड़ी तथा अंग्रेजों को अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा इसलिए लड़ाई में अंग्रेजों को भारी नुकसान उठाना पड़ा तथा उसके हजारों सैनिक मारे गए अंग्रेजों ने अफगानिस्तान के मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति में अंग्रेजों ने अफगानिस्तान पर आप आए यहां तक कि उन्होंने अपना रेजिडेंट भी नहीं रख पाए की विदेश नीति पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए उन्हें सफलता प्राप्त हुई 40 साल बाद भारत को स्वतंत्र भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारित की गई उत्तर पश्चिम में सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्रोह को दबाने के लिए सरकार को भेजनी पड़ती थी सीमावर्ती क्षेत्रों को एक उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत बना दिया गया था अंग्रेजों ने मामला के सभी भारतीय राज्य के अंग बन गए..