भारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित शब्दों पर विचार करें-
एरिपति-
एरिपत्ति जलाशय के पुनर्निर्माण के लिए लगाया जाने वाला कर था ।
तनियूर-
तनियूर चोल काल की एक विशिष्ट राजस्व इकाई थी जिसके अंतर्गत प्रमुख ब्रम्हदेय एवं मंदिर बस्तियां विकसित हुई तथा इसके अधिकार क्षेत्र में अनेकों राजस्वग्राम छोटी बस्तियां व शिल्प केंद्र थे ।
घटिका:-
घटिका पल्लव कालीन मंदिरों से जुड़ी उच्च शिक्षा संस्थाएं थी ।
2. सम्राट अशोक के राज्यादेशों का सबसे पहली विघटन:-
मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल की सबसे जानकारी का स्रोत उसके अभिलेख हैं । यह अभिलेख ब्राम्ही, अरामाइक, खरोष्ठी तथा ग्रीक लिपियों में प्राप्त हुए । इन अभिलेखों की लिपि को पढ़ने का श्रेय अंग्रेज विद्वान जेम्स प्रिंसेप को दिया जाता है । जेम्स प्रिंसेप एक नील जमींदार तथा पुरातत्वविद् थे ।
जेम्स प्रिंसेप ने ही 1838 ईस्वी में अशोक के सभी अभिलेखों को पढ़ा और ब्राम्ही लिपि के अक्षरों से सबको परिचित कराया । इसके अलावा प्रिंसेप मानचित्र विशेषज्ञ एवं मुद्रा शास्त्र के लिए भी जाने जाते हैं ।
मैक्समूलर जर्मनी के अंग्रेज विद्वान थे , इन्होंने इंग्लैंड में रहकर संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की तथा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृत का अध्ययन किया । इन्होंने ही भारत में आर्यों का आगमन मध्य एशिया बताया जो आज भी मान्य है ।
विलियम जोन्स प्राचीन विधि शास्त्री थे जिन्होंने भारत में एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की थी ।
3. मध्यकालीन भारत के आर्थिक इतिहास के संदर्भ में शब्द 'अरघट्टा' निरूपित करता है -
मध्यकालीन भारत के इतिहास के संदर्भ में शब्द ' अरघट्टा' भूमि की सिंचाई के लिए प्रयुक्त जल चक्र को निरूपित करता है । 'अरघट्टा' प्रणाली का प्रयोग पूर्व मध्यकालीन इतिहास 600 से 1200 ईसवी के मध्य हुआ था । अरघट्टा प्रणाली को मानसून समय में अत्यधिक प्रयोग में लाया जाता था क्योंकि यह वर्षा जल संचयन का साधन भी था । इस सिंचाई तकनीक का प्रयोग सर्वप्रथम फारस वासियों ने किया था, जिसे उन्होंने भारत में विकसित किया तीसरी शताब्दी तक यह अपने प्राचीन रूप में थी लेकिन उत्तर गुप्त काल तक आते आते यह संपूर्ण रूप में विकसित हो चली और अरघट्टा सिंचाई प्रणाली में मध्यकालीन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया ।