विद्रोह ज्यादा बढ़ने के कारण , सेना का पुनर्गठन किया गया पहले बंगाल मद्रास और मुंबई प्रांतों की अपनी अलग अलग सेनाएं थी.
प्रत्येक प्रांत के सेना में भारतीय सैनिक कंपनी द्वारा भर्ती किए गए यूरोपी शासकों सैनिकों की टुकड़ी हो तथा ब्रिटिश सैनिकों और ब्रिटिश सेना की इकाइयों को मिला दिया गया
1859 ईसवी में प्रांतों की प्रथक सेनाओं का एकीकरण किया गया तथा भारत में ब्रिटिश सरकार की समस्त सेना को एक सेना अध्यक्ष के नियंत्रण में लाया गया भारतीय सैनिकों को तोपखाने और शस्त्रागार ओं से अलग रखने का निर्णय लिया गया यूरोपीय सैनिकों की संख्या में भी वृद्धि की गई भारतीय सैनिकों और यूरोपीय सैनिकों का अनुपात 2:1 रखा गया बाद में इसे बढ़ाकर 5:2 कर दिया गया. यह व्यवस्था 1914 में प्रथम महायुद्ध प्रारंभ होने तक कायम रही अपनी स्थिति को अधिक मजबूत बनाने के लिए अंग्रेजों ने फूट डालो और शासन करो की नीति अपनाई विभिन्न इलाकों जातियों या कवियों के सैनिकों की कंपनियों को मिलाकर रेजिमेंट का गठन किया गया अंग्रेजों ने अपनी भारतीय सेना का इस्तेमाल भारत पर अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य भागों में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए भी किया गया इस तरह से सेना का पुनर्गठन अंतिम रूप से किया गया.