क्रमशः..
Day – 04
1726 ई. का राजपत्र (चार्टर)
- सन् 1726 ई. के राजपत्र द्वारा भारत की न्याय-पध्दति के विकास में एक नये युग का सुत्रापात हुआ।
- ब्रिटिश क्राउन जार्ज प्रथम द्वारा 24 सितम्बर, 1726 को 1726 ई. का राजपत्र (चार्टर) स्वीकार किया गया।
- इस राजपत्र के द्वारा ऐसी न्याय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया जिसके अनुसार प्रत्येक प्रेसीडेन्सी नगर में, समान संरचना व समान न्यायधिकार वाली ‘मेयर कोर्ट’ स्थापित की गयी।
- राजपत्र (चार्टर) द्वारा प्रेसीडेन्सी नगरों में ‘कारपोरेशन’ स्थापित करने की योजना रखी गयी। प्रस्तावित कारपोरेशन की सदस्यता में 1 मेयर तथा 9 एल्डरमेन (विशिष्ट सभासद) शामिल किये गये। मेयर तथा एल्डरमेन को एक न्यायालय में भी सुसंगठित किया गया जिसे मेयर कोर्ट कहा गया।
- 1726 ई. के राजपत्र (चार्टर) के द्वारा भारत में ‘अपकृत्य विधि’ (Law of Torts) का भी प्रादुर्भाव हुआ।
- प्रेसीडेन्सी नगरों में मेयर कोर्ट की स्थापना सर्वप्रथम कलकत्ता में की गई। बाद में इसे बम्बई तथा मद्रास में स्थापित किया गया।
- 17 सितम्बर, 1746 ई. को फ्रांसीसी सेना ने मद्रास नगर पर आक्रमण किया तथा अंग्रेजी बेड़े को 5 दिन की लगातार बमबाजी के बाद प्रास्त कर दिया, परन्तु सन् 1749 ई. में मद्रास नगर पर अंग्रेजो का प्रभुत्व फिर स्थापित हो गया।
- कम्पनी के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों ने यह सुझाव दिया कि मद्रास में फ्रांसीसी सत्ता स्थापित हो जाने के बाद सन् 1726 ई. का चार्टर व उसके द्वारा स्थापित मेयर कोर्ट का अस्तित्व समाप्त हो गया था। अतः उसका पुनर्गठन नये सिरे से नये चार्टर द्वारा ही सम्भव है।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, '1753 ई. का राजपत्र (चार्टर)' के विषय पर चर्चा करने के लिये..