बिंबिसार(हर्यक वंश 544-492 ई०पु०)-चेटक की पुत्री चेेलेना तथा कौशल नरेश प्रसेनजित की बहन महाकोशला से विवाह किया, श्रेणिक की उपाधि धारण की , अंंग को विराजित किया था राज वैद्य जीवक को पांडु रोग से पीड़ित अवन्ति शासक प्रद्दोत की सुश्रुषा हेतु भेजा
अजातशत्रु( हर्यक वंश 492 -460 ई०प०ू )
यह पित्तृहंन्ता था जिसने कुणिक उपनाम धारण किया तथा अपने मंत्री वसस्कार एवं महाशीलाकंटक यंत्र के कारण लिच्छिवियों को पराजित किया ।इसके अतिरिक्त पटालिग्राम की स्थापना की तथा प्रथम बोध संगति का राजगृह में आयोजन कराया।
चंद्रगुप्त मौर्य (मौर्य वंश 322 -298 ई० पू०) मौर्य वंश का संस्थापक ,चाणक्य मुख्य सलाहकार, सेल्युकस को युद्ध में पराजित किया , भारत का प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना की, इंडिका के रचयिता मेगस्थनीज उसके दरबार में आया तथा जीवन के अंतिम दिनों में जैन धर्म अपनाया तथा श्रवणबेलगोला जाकर अपना प्राण त्याग किया।
अशोक (मौर्य वंश 268 - 232 ई० पू०)
प्रियदर्शी की उपाधि धारण किया, कलिंग के युद्ध के पश्चात ह्रदय परिवर्तन के कारण बौद्ध धर्म अपनाया, धम्म चलाया एवं उसके प्रचार के लिए महामात्रों की नियुक्ति की। 14 शिलालेख भारत के 8 स्थानों पर खुदवाए, लघु शिलालेख एवं 6 स्थानों पर 7 स्तंभ लेख खुदवाए एवं नागार्जुन की पहाड़ियों पर गुहा आलेख लिखवाने एवं तृतीय बौद्ध संगीति बुलाने का भी कार्य किया।
कनिष्क( कुषाण वंश 78--102 ई०)
सर्वाधिक शुद्ध सोने के सिक्के चलाए एवं चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन कश्मीर के कुंडलवन में कराया।