जीव विज्ञान - कोशिका : अर्ध्दसूत्री विभाजन - 01

अर्ध्दसूत्री विभाजन (Meiosis, मिओसिस)

फार्मर तथा मूरे (1905 में) ने कोशिकाओं में अर्ध्दसूत्री विभाजन को मियोसिस नाम दिया।

             इस प्रकार का विभाजन केवल जनन कोशिकाओं में होता है। इसके माध्यम से जंतुओं में शुक्राणु और अंडाणु तथा पौधों में नर एवं मादा युग्मक बनते हैं। इसमें सूत्री विभाजन के विपरीत गुणसूत्र संख्या कम होकर आधी रह जाती है इसलिए इसे ‘न्यूनकारी विभाजन कोशिका विभाजन’ भी कहते हैं।

           मिओसिस की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होती है – (i)  मिओसिस I, (ii)- मिओसिस II। मिओसिस I में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है, परन्तु गुणसूत्रों का विभाजन नहीं होता है इस चरण को न्यूनकारी विभाजन (Reduction division) भी कहते हैं। मिओसिस II में प्रत्येक गुणसूत्र के अर्ध्द-गुणसूत्र पृथक्-पृथक् हो जाते हैं (जैसे, माइटोसिस में)। दोनों चरणों के पूरा होने पर मिओसिस में एक जनक कोशिका से चार कोशिकाएं बन जाती हैं।

शेष अगले नोट्स में .. 

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