सबसे भारी संचार उपग्रह GSAT-29 का सफल प्रक्षेपण

  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किए गए GSAT-29 ओपेरा का वजन 3423 किलोग्राम है। अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है ।इस उपग्रह में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बूस्टर S-200 का प्रयोग किया गया है ।इसमें 'Q&V'बैंड के ट्रांसफार्मर लगे हैं, इससे संचार की जरूरतें पूरी होगी। यह भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में हाई स्पीड डाटा को ट्रांसफर करने में मदद करेगा।
  •  यह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए जाने वाला 76 और स्वदेश निर्मित  33 संचार उपग्रह है। इस लांचिंग के साथ ही शुरू के लिए यह वर्ष की पांचवी बड़ी लांचिंग है ।इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने इस उपलब्धि का पूरा  श्रेय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को दिया है।

क्या होंगे लाभ?

  • इसरो के जीसैट -29 की लॉन्चिंग भारत के काफी अहम मानी जा रही इससे जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिलेगी।
  • इसमें लगे 'जियो i' वाली नामक कैमरे से हिंद महासागर में जहाजों पर भी निगरानी की जा सकेगी।
  • इसके जरिए इसरो पहली बार लेजर आधारित ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम का परीक्षण कर रहा है।

G-SET 29 का प्रक्षेपण सफर

  • 13 नवंबर 2018 को दोपहर 2:50 बजे 'गाजा' तूफान के खतरे के बावजूद उड़ान की प्रक्रिया आरंभ हुई तकरीबन 27 घंटे बाद 14 नवंबर 2018 को शाम 5:08 बजे GSLV- MK-3 ने जीसैट -29 को लेकर उड़ान भरी।
  • उड़ने के महज 16 मिनट 43 सेकंड में उसने संचार उपग्रह का 36000 किलोमीटर दूर अंतिम भू स्थैतिक कक्षा में पहुंचा दिया। जहां से Q&V बेंड हाई थ्रोपुत ट्रांसपोर्टरों वाली सेटेलाइट को अगले कुछ दिनों में वैज्ञानिक 55 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थापित करेंगे।यह उपग्रह अगले 10 वर्षों तक अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

क्या है GSLV-MK-3-D2?

  • GSLV-MK3-D2 इसरो द्वारा तैयार किया गया है अब तक का सबसे भारी रॉकेट है, यह रॉकेट पूरी तरह से भारत में निर्मित है।
  •  इस रॉकेट में स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ नया क्रायोजेनिक इंजन लगा है ,जिसमें लिक्विड ऑक्सीजन हाइड्रोजन का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होता है।
  • यह इसकी दूसरी उड़ान थी यह रॉकेट देश के सभी लॉन्च व्हीकल ओं में सबसे भारी है ,परंतु सबसे छोटा भी है।

निष्कर्ष

  • भारत के इस सफल संचार उपग्रह के प्रक्षेपण से भविष्य में अनेक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इस बड़ी उपलब्धि के पश्चात भारत दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में सफल हो पाएगा तथा कश्मीर में आतंकवादियों पर नजर रखने में सफलता प्राप्त करेगा।

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