- इस विशाल अभियान के लिए भारत ने 20 अरब डॉलर का बजट रखा था।
- अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला की प्रधानता वाले घरों, छोटे एवं भूमिहीन किसानों को शौचालयों के निर्माण के लिए 12,000 रु. की धनराशि का सहयोग देते हुए, कुल 8.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
- पिछले चार वर्षों में 50 करोड़ से अधिक लोगों ने खुले में शौच की अपनी आदत को छोड़ा।
- 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता का प्रतिशत 39 था, जो स्वच्छ भारत मिशन के चलते 2018 में 93 प्रतिशत हो गया।
- भारत में स्वच्छता में निवेश के चलते, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 2019 तक भारत खुले में शौच से पूर्ण रूप से मुक्त होने तक 3 लाख जीवन बचाने में सफलता पा लेगा।
इस दिशा में भारत, विश्व में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारत के अनुभवों एवं कार्यान्वयन नीति के गुर, अनेक देश सीखना चाहते हैं। 29 सितम्बर से 2 अक्टूबर के बीच विभिन्न देशों से आए 50 स्वास्थ्य मंत्रियों ने महात्मा गांधी इंटरनेशनल सैनीटेशन कन्वेशन में भाग लिया। इस सम्मेलन के माध्यम से भारत ने भी स्वच्छता के प्राप्त लक्ष्य को लंबे समय तक बनाए रखने के बारे में अन्य देशों से सीखा है। यही इस मिशन की उपलब्धि है।