1984 के सिख विरोधी दंगे में पहली सजा-ए-मौत

त्वरित प्रसंग:-

  • 20 नवंबर 2018 को दिल्ली की निचली अदालत पटियाला हाउस कोर्ट ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में घटना के 34 वर्ष बाद पहली बार किसी अपराधी को मौत की सजा सुनाई है। एक दोशी यशपाल सिंह को मौत की सजा सुनाई गई जबकि इस मामले की दूसरे आरोपी नरेश सहरावत को उम्र कैद की सजा दी गई है। इन दोनों दोषियों को दक्षिणी दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों में भागीदार होने के कारण सजा सुनाई गई है।
  • गौरतलब है कि यह मामला 1994 से बंद था एनडीए सरकार 2015 में विशेष जांच दल एसआईटी गठित कर इस मामले को दोबारा खुलवाया था।
पृष्ठभूमि:-
  • पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में फैले सिख विरोधी दंगों में हजारे सुखों की जान गई थी 1 नवंबर 1984 को भारत की इतिहास की सबसे भयानक घटना थी। राजधानी दिल्ली सहित कानपुर, राउरकेला और देश के अन्य सभी शहरों में करीब 15000 सिखों की हत्या कर दी गई थी।
  • इस अकेले दिल्ली में ही सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2733 लोगों की हत्या हुई थी।
Posted on by