भारत में सिंचाई परियोजनाओं को तीन भागों में विभाजित किया गया है।यह है:-
1-वृहद सिंचाई परियोजना
2-मध्यम सिंचाई परियोजना
3-लघु सिंचाई परियोजना
वृहत सिंचाई परियोजना के अंतर्गत पर परियोजना सम्मिलित की जाती है जिसके अंतर्गत 10000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि हो।
मध्यम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत में परियोजना सम्मिलित की जाती है जिसके अंतर्गत 2000 से 10000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो।
लघु सिंचाई परियोजना के अंतर्गत में परियोजना सम्मिलित की जाती है जिसके अंतर्गत 2018 से कम कृषि योग्य भूमि हो।
वर्तमान समय में भारत की कुल सिंचित क्षेत्र का 37% बड़ी एवं मध्यम सिंचाई परियोजना के अधीन तथा 63% छोटी सिंचाई योजनाओं के अधीन है।
विश्व का सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र चीन में 21% एवं भारत में 20.2 % है।
भारत में शुद्ध बोए गए क्षेत्र के लगभग 33% भाग पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में कुआं और नलकूप भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन है।
कुआं व नलकूप द्वारा 55.9% सिंचित भाग, नहर द्वारा 31.4% सिंचित भाग, तालाब 6.1% तथा अन्य स्रोत से 6.6% सिंचित भाग है।
देश में सर्वाधिक नलकूप व पंपसेट तमिलनाडु में पाए जाते हैं ,महाराष्ट्र दूसरा स्थान है। केवल नलकूपों की सर्वाधिक सघनता वाला राज्य उत्तर प्रदेश है।
प्रायद्वीपीय भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन तालाब है ,तालाब द्वारा सर्वाधिक सिंचाई तमिलनाडु राज्य में की जाती है।
दमन गंगा सिंचाई परियोजना दमन गंगा नदी पर कार्यरत है इस परियोजना के तहत बना जलाशय गुजरात के वलसाड जिले में स्थापित है ,यह गुजरात एवं दादर एवं नागर हवेली की संयुक्त परियोजना है।
गिरना सिंचाई परियोजना महाराष्ट्र के नासिक जिले में गिरना नदी पर स्थित की गई है।
पांबा सिंचाई परियोजना केरल के पांबा नदी पर स्थित है।
टिहरी पनबिजली कांपलेक्स उत्तराखंड के टिहरी के समीप भागीरथी तथा भिलंगाना नदी पर स्थित है यहां से सिंचाई जल आपूर्ति तथा जल विद्युत उत्पादन किया जाता है।
राष्ट्रीय जल संभर परियोजना का क्रियान्वयन कृषि मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
भारत सरकार ने 1983 में राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद का गठन किया प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष एवं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री इसके उपाध्यक्ष होते हैं । जल संसाधन राज्यमंत्री संबंध केंद्रीय मंत्री सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ प्रदेशों के उपराज्यपाल इसके सदस्य होते हैं जल संसाधन मंत्रालय का सचिव परिषद का सचिव होता है।