लोकसभा में 31 दिसंबर को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी।
इसका मकसद आयुर्विज्ञान शिक्षा और आयुर्विज्ञान व्यवसाय की विनियामक प्रणाली की पुन: संरचना एवं भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद में सुधार लाना है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि आयुर्विज्ञान चिकित्सा व्यवस्था के बेहतर नियमन तथा चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए अध्यादेश लाया गया था और अब यह विधेयक लाया गया था।
विधेयक पर चर्चा के बाद मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य मामलों से संबंधित संसदीय समिति ने भी सिफारिश की थी कि एमसीआई की कार्यपद्धति में सुधार के लिए बदलाव किए जाएं। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने एन के प्रेमचंद्रन के सांविधिक संकल्प को नामंजूर करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने राष्ट्रपति द्वारा 26 सितंबर 2018 को प्रख्यापित भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन अध्यादेश का निरानुमोदन करने का सांविधिक संकल्प प्रस्तुत किया था।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1956 को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) के पुनर्गठन और भारत के लिये एक चिकित्सक रजिस्टर रखे जाने तथा तत्संबद्ध विषयों का उपबंध के लिये अधिनियमित किया गया था।
भारतीय चिकित्सा परिषद के मुख्य कार्य केंद्र सरकार को चिकित्सीय अर्हताओं की मान्यता, अध्ययन पाठ्यक्रमों का अवधारण करने और अपेक्षित परीक्षाओं का निरीक्षण और चिकित्सीय व्यवसायियों के रजिस्टर आदि के संबंध में सिफारिश करना है।