क्रमशः..
Day - 06
1765 – 1885 ई. (ब्रिटिश शासन की स्थापना)
रेग्यूलेटिंग ऐक्ट, 1773
- गोपनीय समिति ने अपनी सिफारिश में कम्पनी के शासन-व्यवस्था व न्याय संचालन का भंडाफोड़ किया जिसे रेग्यूलेटिंग ऐक्ट के विधान द्वारा दूर करने का प्रयास किया गया।
- गोपनीय समिति की सिफारिश के फलस्वरुप ब्रिटिश संसद ने सन् 1773 ई. का रेग्यूलेटिंग ऐक्ट पारित किया। ब्रिटेन की सरकार का भारतीय शासन-व्यवस्था में इस ऐक्ट के माध्यम से प्रथम सरकारी दखल था जबकि ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत में अपने कार्यकाल की लगभग एक शताब्दी पूरी कर चुकी थी।
- ब्रिटिश संसद ने सन् 1773 ई. के रेग्यूलेटिंग ऐक्ट के माध्यम से ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर अपना मनचाहा नियंत्रण स्थापित कर सकी।
- रेग्यूलेटिंग ऐक्ट के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे –
- भारत में एक सुनिश्चित शासन पध्दति की शुरुवात।
- बंगाल प्रेसीडेन्सी के प्रशासन के लिए एक गवर्नर जनरल की नियुक्ति।
- बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल और उसके चार सभासदों का नामंकन।
- कलकत्ते में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना और इसके निर्णय के विरुध्द अपील का अधिकार ब्रिटेन स्थित प्रिवी कौंसिल को।
- रेग्यूलेटिंग ऐक्ट द्वारा निहित अधिकार को कार्यान्वित करने के लिए 26 मार्च 1774 ई. को जार्ज तृतीय के द्वारा 1774 ई. का ‘चार्टर ऑफ जस्टिस’ जारी किया गया। जिसके द्वारा कलकत्ता में ‘सुप्रीम कोर्ट ऑफ जूडिकेचर’ (सुप्रीम कोर्ट) की स्थापना की गई।
- कलकत्ता के सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णीत ‘नन्दकुमार का मामला’ कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
- ब्रिटिश पार्लियामेंट के अनुसार रेग्यूलेटिंग ऐक्ट ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर सर्कार का कोई निश्चित नियंत्रण स्थापित नहीं कर सका और न कम्पनी के डायरेक्टर का ही कोई नियंत्रण कम्पनी के कर्मचारियों के ऊपर दे सका।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, ऐक्ट ऑफ सेटिलमेंट, 1781 ई. के विषय पर चर्चा करने के लिये..