वैश्विक आरटीआई रेटिंग, 2018 के विषय में संक्षिप्त जानकारी


➡  हाल ही में एसेस इंफो यूरोप एवं सेंटर फ़ार लॉ एंड डेमोक्रेसी द्वारा वैश्विक सूचना का अधिकार रेटिंग 2018 जारी किया गया।
 
➡ इस सूची में आरटीआई अधिनियम लागू करने वाले 123 देशों को शामिल कर उन्हें रैंकिंग प्रदान की गई है।

➡ यह रैंकिंग 61 संकेतों के आधार पर दी गई है तथा इन संकेतों को को सात श्रेणियों में विभाजित किया गया है। यह सात श्रेणियों इस प्रकार है ,पहुंच का अधिकार, व्यापक, अनुरोध प्रक्रिया, अपवाद और प्रतिशत अपील, स्वीकृति और संरक्षण तथा विज्ञापन संबंधी उपाय।

➡ उपर्युक्त संकेतों  एवं श्रेणियों के आधार पर सूची में शामिल सभी देशों को कुल 150 अंकों में से अंक प्रदान कर रैंकिंग तैयार की गई।

➡ इस सूची में अफगानिस्तान (139 अंक) सिर्ष स्थान पर है उसके पश्चात क्रमशः मैक्सिको, सर्बिया, श्रीलंका, स्लोवेनिया एवं भारत (128 अंक) का स्थान है।

➡ वहीं इस सूची में पलाऊ (123) वें एवं ऑस्ट्रेलिया (122 वा) स्थान पर है पर दोनों देशों को 150 में से 33 अंक प्राप्त हुए हैं ,गौरतलब है कि वर्ष 2011 में इस रेटिंग की शुरुआत होने पर भारतवर्ष 2011, 2012, 2013 में लगातार द्वितीय स्थान पर था। परंतु उसके बाद भारत की रैंकिंग में कमी आई एवं वर्तमान रैंकिंग में भारत छठे स्थान पर है।

➡ अफगानिस्तान पहली बार इस रैंकिंग में प्रथम स्थान पर रहा।

RTI रेटिंग-:

➡ वैश्विक सूचना का अधिकार रेटिंग वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों में मौजूद सूचना का अधिकार संबंध कानूनी संरचना का तुलनात्मक मूल्यांकन करने की एक प्रक्रिया है।

➡इस रेटिंग में दिए गए अंक संबंधित देशों में आरटीआई कानून की समस्या कमजोर स्थिति को दर्शाता है जहां अधिक अंक मजबूत स्थिति का परिचायक है वहीं कम अंक कमजोर स्थिति का इसे इनको यूरोप एक मानवाधिकार संगठन है जो कि यूरोप में सूचना का अधिकार को संरक्षण एवं बढ़ावा देने के प्रति समर्पित संस्थान है।

➡ वहीं ' सेंटर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी' कनाडा में अवस्थित एक गैर लाभकारी संगठन है जो कि मानव अधिकार  को संरक्षण एवं बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत है।

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