क्रमशः..
Day - 08
पिट्स इण्डिया ऐक्ट, 1784
- 1784 ई. में ‘लार्ड पिट’ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
- जब 1781 ई. के ऐक्ट ऑफ सेटिलमेंट से कम्पनी के प्रबन्ध में सुधार नहीं हुआ तो उस पर अपने नियंत्रण को और बढ़ाने तथा उसे प्रभावी बनाने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा सन् 1784 ई. में ‘पिट्स इण्डिया ऐक्ट’ पारित किया गया।
- इस ऐक्ट के द्वारा कम्पनी के व्यापरिक एवं राजनैतिक क्रिया-कलापों को पृथक्-पृथक् कर दिया गया।
- व्यापरिक कार्य-कलापों को कम्पनी के निदेशकों के हाथों में ही यथावत् रखते हुए राजनैतिक क्रिया-कलापों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण हेतु एक नियंत्रण-मण्डल की स्थापना की गई।
- नियंत्रण-मण्डल के सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार ब्रिटिश क्राउन (सम्राट) को सौंपा गया।
- पिट्स इण्डिया ऐक्ट, 1784 के द्वारा भारतीय उपनिवेश के अब दो शासक हो गये –(1) कम्पनी का निदेशक बोर्ड, तथा (2) नियंत्रक मण्डल के माध्यम से ब्रिटिश सम्राट। इसका परिणाम यह हुआ कि कम्पनी पर निदेशकों का नियंत्रण अपेक्षाकृत कम हो गया तथा ब्रिटिश संसद का नियंत्रण बढ़ गया।बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल पर था।
- पूर्व के देशों में ब्रिटिश उपनिवेशों के प्रशासन के ऊपर नियंत्रण तथा निरीक्षण का भार
- कार्नवालिस ने न्याय-प्रशासन में सुधार के लिए तीन योजनायें बनाईं, जिन्हे सन् 1787, 1790 एवं 1793 की योजना के नाम से सम्बोधित किया जाता है।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, 1793 ई. का राजपत्र (चार्टर) और 1813 ई. का राजपत्र (चार्टर) के विषय पर चर्चा करने के लिये..