क्रमशः..
Day - 09
1793 ई. का राजपत्र (चार्टर)
- सन् 1793 ई. की न्याय-व्यवस्था कार्नवालिस की उच्चकोटि की कार्यक्षमता तथा कार्यनिष्ठता की परिचायक थी।
- 1793 ई. के राजपत्र द्वारा अंगेजों को कम्पनी के न्यायालयों की न्याय-सीमा के भीतर भारत के मूलवासियों के समकक्ष लाया गया।
- इस चार्टर द्वारा कम्पनी के व्यापार करने की अवधि को 20 वर्ष के लिए और बढ़ा दिया गया।
1813 ई. का राजपत्र (चार्टर)
- इस राजपत्र के माध्यम से ब्रिटिश सरकार द्वारा कम्पनी पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया गया।
- इसके द्वारा कम्पनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया और ब्रिटेन के सभी नागरिकों को भारत से व्यापार करने का अधिकार प्रदान किया गया परन्तु चीन के साथ व्यापार व चाय के व्यापार का एकाधिकार कम्पनी ने अपने पास सुरक्षित रखा।
- इसके द्वारा भारतीयों के लिए एक लाख रुपये का वार्षिक शिक्षा एवं साहित्य में सुधार तथा भारतीय प्रदेशों में विज्ञान की प्रगति के लिए खर्च करने का प्रावधान किया गया।
- राजपत्र के द्वारा कलकत्ता, बम्बई और मद्रास की सरकारों द्वारा निर्मित विधियों पर ब्रिटीश संसद का अनुमोदन आवश्यक बना दिया गया।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, 1833 ई. का राजपत्र (चार्टर) के विषय पर चर्चा करने के लिये..